छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार की काली कहानी का सिलसिला… घोटालों की लंबी फेहरिस्त, जहां नेताओं के नाम FIR में दर्ज
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रायपुर, 22 दिसंबर 2025 : छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार अब पुरानी बीमारी बन चुका है। पिछले 20 वर्षों (2005-2025) में राज्य करोड़ों-अरबों के घोटालों का गढ़ रहा, जहां कोयला से लेकर शराब, चावल मिल से सड़क परियोजनाओं तक हर क्षेत्र में लूट का खेल चला। हालिया शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य पर 200-250 करोड़ के आरोपों ने फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईडी और ईओडब्ल्यू की जांचों में कई नेताओं के नाम सामने आए हैं, लेकिन केवल उन मामलों को ही यहां उजागर किया गया है जहां FIR दर्ज हुई या ठोस सबूत हैं।
कांग्रेस और भाजपा दोनों सरकारों के समय ये घोटाले फले-फूले, जिसका खामियाजा राज्य की जनता भुगत रही.. कर्ज बढ़ा, विकास रुका। क्या ये सिस्टम की नाकामी है या राजनीतिक संरक्षण का नतीजा?
आंकड़े साफ कहते हैं राज्य का कर्ज-जीएसडीपी अनुपात 24% पर पहुंच चुका, जबकि गरीबी दर 16.37% बनी हुई।
घोटालों का काला सिलसिला, जहां सबूतों पर आधारित नाम उजागर
पिछले दो दशकों में छत्तीसगढ़ के प्रमुख घोटालों में राजनेता, नौकरशाह और व्यापारियों का गठजोड़ सामने आया। ईडी, सीबीआई और राज्य एजेंसियों की FIRs बताती हैं कि ये घोटाले राजस्व चूसते रहे। यहां केवल वे मामले हैं जहां नेताओं के खिलाफ FIR या चार्जशीट हुई, बिना सबूत के कोई नाम नहीं जोड़ा गया। भाजपा पुराने कांग्रेस घोटालों को निशाना बना रही, जबकि कांग्रेस वर्तमान लापरवाही पर सवाल उठा रही। लेकिन हकीकत? दोनों पक्षों के नेताओं के नाम FIR में दर्ज।
यहां प्रमुख घोटालों की सूची और विश्लेषण है, नेताओं का नाम केवल FIR/सबूत के आधार पर
1. पीएम आवास योजना (PMAY) घोटाला (2016-2025): राज्य में PMAY के तहत फर्जी लाभार्थी और धन के गबन के आरोप लगे, लेकिन ठोस FIR नेताओं के खिलाफ नहीं मिली। ईओडब्ल्यू ने 2025 में कुछ अधिकारियों पर केस दर्ज किया, लेकिन कोई बड़ा नेता नामजद नहीं। अनुमानित नुकसान: सैकड़ों करोड़। भाजपा सरकार के समय की जांच जारी, कांग्रेस इसे ‘राजनीतिक बदला’ बता रही।
2. धान घोटाला (Dhan Ghotala, 2018-2025): धान खरीदी में अवैध वसूली और फर्जी खरीदी के आरोप। 2025 में 13,000 करोड़ का दावा, लेकिन नेताओं के खिलाफ कोई स्पष्ट FIR नहीं। कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर ‘प्रक्रिया में देरी’ का आरोप लगाया, विधानसभा में वाकआउट किया। अनुमानित नुकसान: हजारों करोड़। किसानों को टोकन और भुगतान में परेशानी, लेकिन सबूतों के अभाव में कोई नेता नामजद नहीं।
3. चावल घोटाला (Rice Ghotala/PDS स्कैम, 2012-2025): सबसे पुराने और बड़े घोटालों में से एक, जहां PDS (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) में अनियमितताएं हुईं। ईडी ने 2023 में 175 करोड़ की रिश्वत का दावा किया।
FIRs में नाम
अनवर ढेबर : चावल मिलों को बढ़ी सब्सिडी देने के आरोप, 2025 में ईओडब्ल्यू ने चार्जशीट दाखिल की।
अनिल टुटेजा (पूर्व आईएएस): 2025 में चार्जशीट, मिलों को फर्जी इंसेंटिव देने का आरोप।
अमितेश शुक्ला (भाजपा खाद्य मंत्री): 2025 में 50 करोड़ के घोटाले पर एमएलए ने कवर-अप का आरोप लगाया, लेकिन FIR नहीं।
अनुमानित नुकसान: 1,000 करोड़ से अधिक। रमन सिंह (पूर्व भाजपा सीएम) सरकार के समय PDS में अनियमितताएं, सुप्रीम कोर्ट में विवाद।
4. शराब घोटाला (Liquor Ghotala, 2019-2025): सबसे चर्चित, 3,200 करोड़ का। ईओडब्ल्यू ने 2025 में आठवां चार्जशीट दाखिल किया।
FIRs में नाम:
चैतन्य बघेल (भूपेश बघेल के बेटे): 2025 में ईडी गिरफ्तारी, 16 करोड़ का लाभ, व्हाट्सऐप चैट्स से 200-250 करोड़ का दावा।
कवासी लखमा (पूर्व कांग्रेस मंत्री): 2025 में ईडी गिरफ्तारी, 2 करोड़ रिश्वत का आरोप।
अनिल टुटेजा (पूर्व आईएएस): सिंडिकेट का प्रमुख, 2025 चार्जशीट।
एपी त्रिपाठी (पूर्व आबकारी एमडी): अवैध लाइसेंस वितरण।
सौम्या चौरसिया (पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी, बघेल की सहयोगी): 2025 में ईडी गिरफ्तारी, 115 करोड़ का POC।
अनवर ढेबर : 2025 चार्जशीट, मध्यस्थ।
निरंजन दास (रिटायर्ड आईएएस): 2025 में गिरफ्तारी।
अनुमानित नुकसान: 2,161 करोड़। भूपेश बघेल सरकार के समय चला, ईडी ने 200+ अधिकारियों को निलंबित किया।
5. कोयला घोटाला (Koyala Ghotala/Coal Levy Scam, 2019-2025): कोयला पर 25 रुपये प्रति टन अवैध वसूली। ईडी ने 2023 में छापे मारे।
FIRs में नाम
अमरजीत भगत (पूर्व कांग्रेस मंत्री): 2024 में पहली बार नामजद, कोयला लेवी केस।
कवासी लखमा (पूर्व कांग्रेस मंत्री): 2024 FIR, धोखाधड़ी।
रानू साहू (निलंबित आईएएस): 2025 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत, प्रमुख आरोपी।
सूर्यकांत तिवारी: 2025 जमानत।
सौम्या चौरसिया: कोयला लेवी में शामिल।
अन्य 8 कांग्रेस एमएलए (देवेंद्र सिंह ठाकुर आदि): 2024 FIR।
अनुमानित नुकसान: 540 करोड़। भूपेश बघेल सरकार के समय, ईडी ने 51 करोड़ की संपत्ति जब्त की। राष्ट्रीय कोयला घोटाले (2009-12) में रमन सिंह सरकार के मंत्री शामिल, लेकिन राज्य स्तर पर सीबीआई चार्जशीट।
6. सड़क परियोजना घोटाला (Sadak Pariyojna/Bharat Mala Scam, 2018-2025): भूमि अधिग्रहण में फर्जी मुआवजा। 2025 में 43 करोड़ का घोटाला उजागर।
FIRs में नाम
गोपाल राम वर्मा (राजस्व अधिकारी): 2025 चार्जशीट, फर्जी दावे।
नरेंद्र कुमार नायक (अधिकारी): 2025 में नामजद।
उमा तिवारी, केदार (निजी व्यक्ति): 32 करोड़ केस में।
अनुमानित नुकसान: 350 करोड़। कांग्रेस ने सीबीआई जांच की मांग की, हाईकोर्ट ने 2025 में अग्रिम जमानत खारिज की। कोई बड़ा नेता नामजद नहीं, लेकिन एमएलए चारन दास महंत ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
ये घोटाले न केवल आर्थिक हैं, बल्कि सामाजिक भी – किसानों का मुआवजा लटका, सड़कें अधर में। राज्य का कर्ज 23,900 करोड़ बढ़ा, जबकि फिजूलखर्ची पर करोड़ों खर्च। ईडी ने कुल 215 करोड़ की संपत्तियां जब्त कीं।
नेताओं की भूमिका और सिस्टम की नाकामी
FIRs से साफ है कि अधिकांश घोटाले कांग्रेस सरकार (2018-23) के समय चले, जहां भूपेश बघेल के करीबियों के नाम प्रमुख। कवासी लखमा और अमरजीत भगत जैसे पूर्व मंत्री दो-दो केसों में नामजद। भाजपा के अमितेश शुक्ला पर आरोप हैं, लेकिन FIR नहीं। रमन सिंह के समय PDS और कोयला में अनियमितताएं, लेकिन हालिया जांच कांग्रेस पर केंद्रित।
विशेषज्ञ कहते हैं ‘राजनीतिक संरक्षण के बिना इतने बड़े सिंडिकेट संभव नहीं।’ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित, जो PMLA की वैधता पर सवाल उठा रही। नतीजा? राज्य गरीबी के जाल में फंसा, जहां ग्रामीण दर 25.1% है। समय है पारदर्शी जांच का, न कि साजिशों का।
