छत्तीसगढ़ में RTE सीटों में भारी कटौती पर विवाद, पैरेंट्स एसोसिएशन ने सरकार पर उठाए सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश पाने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों की सीटों में भारी कटौती को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने राज्य सरकार पर गरीब बच्चों के शिक्षा अधिकार को सीमित करने का आरोप लगाया है।
सीटों में बड़ी गिरावट
पैरेंट्स एसोसिएशन के अनुसार, 16 दिसंबर 2025 को किए गए संशोधनों के बाद शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आरटीई के तहत केवल 19,495 सीटें प्रस्तावित की गई हैं। जबकि सत्र 2025-26 में 53,023 बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश मिला था।
प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक
| शैक्षणिक सत्र | प्रवेशित बच्चों की संख्या |
|---|---|
| 2022-23 | 56,679 (रिकॉर्ड) |
| 2020-21 | 52,680 |
| 2019-20 | 48,167 |
| 2025-26 | 53,023 |
| 2026-27 (प्रस्तावित) | 19,495 |
एसोसिएशन का दावा है कि वर्ष 2012 से 2025 तक औसत प्रवेश 40,000 से 50,000 के बीच रहा है, ऐसे में यह 13 वर्षों का सबसे निचला स्तर है।
“असंवैधानिक” बताया संशोधन
क्रिष्टोफर पॉल ने कहा कि निजी स्कूलों की 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। उनका आरोप है कि संशोधन मूल कानून की भावना के विपरीत है और इससे हजारों परिवार प्रभावित होंगे।
स्कूल शिक्षा विभाग से मांग
संशोधित प्रावधानों को तत्काल निरस्त किया जाए।
पुराने नियमों के अनुसार ही प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जाए।
इस संबंध में स्थायी आदेश जारी किया जाए।
सरकार की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार
जनवरी में दो बार पत्र लिखे जाने के बावजूद कोई ठोस जवाब नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल राज्य सरकार या स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से इस मुद्दे पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
इस बीच, आरटीई पोर्टल पर नई सीट संख्या के साथ प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से अभिभावकों में असमंजस और चिंता का माहौल है।
