कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने रखा उपवास

जगदलपुर। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) योजना का नाम बदलने के फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का विरोध अब सड़कों पर उतर आया है। पार्टी ने इसे ग्रामीण रोजगार की पहचान से छेड़छाड़ करार देते हुए प्रदेशव्यापी मनरेगा बचाओ संग्राम शुरू कर दिया है।

इस संग्राम के तहत रविवार (11 जनवरी 2026) को कांग्रेस ने चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत की। एक दिवसीय उपवास रखकर केंद्र की मोदी सरकार के फैसले का विरोध दर्ज किया गया। बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में इस उपवास की कमान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने संभाली।

मां दंतेश्वरी मंदिर के सामने उपवास पर बैठे दीपक बैज

जगदलपुर में मां दंतेश्वरी मंदिर के सामने दीपक बैज जिला कांग्रेस पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ उपवास पर बैठे। उन्होंने केंद्र सरकार के इस फैसले को जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया। उपवास के दौरान उन्होंने कहा, “मनरेगा सिर्फ एक योजना का नाम नहीं है, बल्कि करोड़ों ग्रामीण मजदूरों की आजीविका, सम्मान और पहचान से जुड़ा हुआ है। महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी इस योजना का नाम बदलना उनकी विरासत और ग्रामीण भारत के संघर्ष को कमजोर करने की कोशिश है।”

VB जी राम जी योजना का नाम वापस मनरेगा करने की मांग

प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने केंद्र सरकार से स्पष्ट मांग की कि VB जी राम जी योजना के नाम को तत्काल वापस बदलकर पूर्ववत मनरेगा किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी, “अगर यह मांग पूरी नहीं हुई तो कांग्रेस आंदोलन को और तेज करेगी। हम जिला, तहसील और ग्राम स्तर तक पहुंचकर जनता को जागरूक करेंगे और सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेंगे।”

कांग्रेस का आरोप: ग्रामीण रोजगार की भावनाओं से खिलवाड़

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मनरेगा योजना महात्मा गांधी के ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के सपने का प्रतीक है। नाम बदलने से न केवल योजना की पहचान प्रभावित होगी, बल्कि ग्रामीण मजदूरों के मन में असुरक्षा भी पैदा होगी। पार्टी का दावा है कि केंद्र और राज्य सरकार 100 दिनों का रोजगार भी पूरी तरह सुनिश्चित नहीं कर पा रही है, ऐसे में नाम बदलाव जैसे फैसले ग्रामीण भारत के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाते हैं।

यह उपवास प्रदेशभर में कांग्रेस द्वारा आयोजित एकदिवसीय विरोध कार्यक्रम का हिस्सा था, जिसमें विभिन्न जिलों में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, अन्य विधायक और पदाधिकारियों ने भी भाग लिया। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि यदि केंद्र सरकार नहीं मानी तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसमें धरना, रैलियां और विधानसभा घेराव जैसे कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं।

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