“हमने खून-पानी का कहा था, क्रिकेट का नहीं…” IND-PAK मैच पर BJP सांसद का शर्मनाक बयान, कांग्रेस बोली- BJP का दोहरा चरित्र उजागर

एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले जा रहे क्रिकेट मैच को लेकर देश भर में गहरा राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। देश में व्यापक विरोध और मैच के बहिष्कार की मांग के बावजूद मैच होना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की ‘चुनिंदा राष्ट्रवाद’ की नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए एक वीडियो जारी किया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे वरिष्ठ भाजपा नेताओं के बयानों को पेश किया गया है। इस वीडियो में पीएम मोदी यह कहते दिखाई दे रहे हैं, “पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते,” जबकि अन्य नेता दोहरा रहे हैं कि “आतंकवाद और बातचीत (टेरर एंड टॉक) एक साथ नहीं चल सकते।” कांग्रेस ने इसके जवाब में कड़ा तंज किया है कि भाजपा के लिए अब सिद्धांत ‘खून और क्रिकेट’ एक साथ चल सकते हैं।

“मुनाफे का व्यापार बंद नहीं होगा”: कांग्रेस नेता का तंज

कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने इस पूरे प्रकरण को सरकार का ‘व्यापारिक हित’ बताया। उन्होंने कहा, “व्यापार तो हर जगह चलता रहेगा। इस सरकार का मकसद यही है कि उसके दोस्तों को व्यापार मिलता रहे… इस रोमांच से मोटी रकम कमाई जा रही है, क्योंकि प्रसारण से भारी मुनाफा होता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जहाँ सांस्कृतिक आदान-प्रदान (जैसे टीवी सीरियल) बंद किए गए, वहीं क्रिकेट का व्यापार जारी है।

शहीदों के परिवार का सवाल और सरकार का सन्नाटा

कांग्रेस नेता उदित राज ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए जवान शुभम के परिवार का जिक्र करते हुए सरकार से सीधा सवाल किया। उन्होंने पूछा, “क्या BCCI देश की जनभावनाओं से ऊपर है?” उन्होंने कहा कि अगर यही फैसला विपक्ष की सरकार लेती तो पूरे देश में आंदोलन छिड़ जाता और हिंदू-मुस्लिम नैरेटिव गढ़ा जाता।

उदित राज ने जोर देकर कहा, “हमारी बहनों का सिंदूर अभी धुला नहीं है, उनके आंसू सूखे भी नहीं हैं और आप मैच खेल रहे हैं… ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी है, जो साबित करता है कि पाकिस्तान के साथ संबंध नहीं सुधरे हैं। यह कमाल की बात है कि खून भी बह रहा है और क्रिकेट भी हो रहा है। मैं इसे तानाशाही रवैया मानता हूं।”

इस मैच ने सरकार की ओर से आतंकवाद पर कड़े बयानबाजी और पाकिस्तान के साथ खेल जारी रखने के फैसले के बीच एक गहरा विरोधाभास पैदा कर दिया है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले सत्ता के लाभ और व्यावसायिक हितों के आगे मौन हो गए हैं।

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