राजीव गांधी शिक्षा मिशन में कंप्यूटर घोटाला: 1700 पन्नों का चालान पेश, 3 आरोपी घेरे में

राजीव गांधी शिक्षा मिशन

राजीव गांधी शिक्षा मिशन

राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत कंप्यूटर उपकरणों की खरीदी में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। वर्ष 2011-12 में तय कीमत से लगभग दोगुनी दर पर कंप्यूटर सप्लाई किए जाने के मामले में ईओडब्ल्यू-एसीबी की टीम ने विशेष अदालत में 1700 पन्नों का चालान पेश किया है। इस मामले में ग्लोबल नेटवर्क सॉल्यूशन और मिनी इंफोटेक रायपुर के संचालक समेत तीन लोगों को आरोपी बनाया गया है।

करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप

जांच में सामने आया है कि मिनी इंफोटेक पर करीब 4 करोड़ 72 लाख 88 हजार 462 रुपए की वित्तीय गड़बड़ी करने का आरोप है। आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120 (बी) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

तीन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में पेश हुआ चालान

जांच एजेंसी ने मिनी इंफोटेक के संचालक आलोक कुशवाहा, अंजू कुशवाहा और संजीत साहा के खिलाफ चालान पेश किया है। आरोप है कि इन लोगों ने आपराधिक साजिश रचकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया।

18 जिलों में कंप्यूटर सप्लाई का प्रोजेक्ट

राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत कंप्यूटर समर्थित योजना में राज्य के 18 जिलों की शासकीय उच्च प्राथमिक शालाओं में एलएफडी और टीएफटी कंप्यूटर युक्त उपकरण उपलब्ध कराने की योजना थी।
इस योजना के तहत:

मिनी इंफोटेक ने 2010-11 में 246 और 2011-12 में 246 मॉनिटर सप्लाई किए

ग्लोबल नेटवर्क सॉल्यूशन ने 392 मॉनिटर की आपूर्ति की

फर्जी ऑथराइजेशन लेटर का इस्तेमाल

चालान में बताया गया है कि आरोपियों ने एचपी और एग्माटेल कंपनियों के फर्जी और कूटरचित ऑथराइजेशन लेटर तैयार किए। इन दस्तावेजों के जरिए उपकरणों की सप्लाई को वैध दिखाया गया।

बाजार मूल्य से कई गुना ज्यादा कीमत

जांच में यह भी सामने आया कि मॉनिटर की कीमतें अत्यधिक बढ़ाकर दिखाई गईं।

प्रति मॉनिटर सप्लाई दर: 1,26,500 रुपए

वास्तविक बाजार मूल्य: 57,950 रुपए

इस तरह सुनियोजित तरीके से शासन को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

जांच एजेंसी ने इस मामले से जुड़े शासकीय अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा संबंधित विभाग को भेजी है।

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