हिमाचल में तबाही: किन्नौर में बादल फटने से हाहाकार – 606 सड़कें ठप, कई घर और गाड़ियां बहीं

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में गुरुवार देर रात बादल फटने से भारी तबाही मच गई। निचार इलाके में अचानक आए सैलाब ने कई घरों और वाहनों को क्षति पहुंचाई। तेज बारिश के बाद पहाड़ों से आए पानी और मलबे ने गांवों और सड़कों को अपने कब्जे में ले लिया। लोग जान बचाने के लिए जंगलों की ओर भागने को मजबूर हो गए। प्रशासन और पुलिस की टीमें राहत व बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।

शिमला में लैंडस्लाइड, सर्कुलर रोड बंद

शिमला के एडवर्ड स्कूल के पास गुरुवार रात करीब 1 बजे भूस्खलन हुआ। पहाड़ी खिसकने से पास का बहुमंजिला मकान खतरे में आ गया। सुरक्षा के मद्देनजर शिमला की लाइफलाइन मानी जाने वाली सर्कुलर रोड को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। डीसी शिमला ने एडवर्ड स्कूल में आज और कल के लिए छुट्टी घोषित कर दी है। इसी बीच, कुमारसैन की करेवथी पंचायत में बुधवार शाम तीन मंजिला मकान जमीन धंसने से जमींदोज हो गया। कांगड़ा और हमीरपुर में भी पूरी रात जोरदार बारिश हुई।

606 सड़कें ठप, दो राष्ट्रीय राजमार्ग भी प्रभावित

लगातार बारिश ने पूरे राज्य का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के मुताबिक, अब तक 606 सड़कें बंद हो चुकी हैं। इनमें एनएच-3 (अटारी-लेह मार्ग) और एनएच-503ए (अमृतसर-भोटा मार्ग) जैसे दो राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं। कुल्लू जिले में सबसे ज्यादा 203, मंडी में 198 और शिमला जिले में 51 सड़कें ठप पड़ी हैं।

46% ज्यादा बरसात

हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून ने रिकॉर्ड तोड़ बारिश की है। 1 जून से 18 सितंबर के बीच 1019.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य औसत 698.3 मिमी है। यानी राज्य में 46% ज्यादा बरसात हो चुकी है। सबसे अधिक बारिश मंडी जिले में दर्ज की गई, जहां 1901.2 मिमी पानी बरसा।

वैष्णो देवी यात्रा बहाल

इधर, जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन और खराब मौसम के चलते 22 दिनों से रुकी माता वैष्णो देवी यात्रा गुरुवार को फिर शुरू कर दी गई है। मौसम सुधरने के बाद सुबह से ही पंजीकरण और यात्रा दोनों सुचारू रूप से जारी हैं।

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