JNU में फिर तनाव… मार्च पर क्यों अड़े हैं 500 छात्र? जानें आधी रात बवाल की पूरी कहानी
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) का परिसर एक बार फिर उबाल पर है। छात्रसंघ (JNUSU) ने 26 फरवरी को कैंपस से शिक्षा मंत्रालय तक ‘लॉन्ग मार्च’ निकालने का आह्वान किया था। मार्च का मुख्य उद्देश्य ‘रोहित एक्ट’ (राहुल वेमुला एक्ट के नाम से जाना जाने वाला प्रस्तावित कानून) को लागू करना, University Grants Commission (UGC) की इक्विटी रेगुलेशंस को लागू करना, कुलपति संतिश्री धूलिपुडी पंडित के इस्तीफे की मांग और विश्वविद्यालय में फंड कटौती तथा JNUSU पदाधिकारियों की रस्टिकेशन के खिलाफ विरोध जताना था।
मार्च की घोषणा के बाद सैकड़ों छात्र जुटे, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस ने कैंपस के मुख्य गेटों पर बैरिकेड्स लगाकर बाहर निकलने से रोक दिया। दिल्ली पुलिस, Rapid Action Force (RAF) और Central Reserve Police Force (CRPF) की भारी तैनाती की गई। छात्रों के बाहर निकलने की कोशिश पर धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई।
प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़े, पत्थर, जूते और डंडे फेंके, पुलिसकर्मियों पर हमला किया। कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए, यहां तक कि कुछ को कथित तौर पर काटा भी गया। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की। कुल 51 छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से 14 को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार छात्रों में JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार, सचिव गोपिका, महासचिव दानिश और AISA की अखिल भारतीय अध्यक्ष नेहा शामिल हैं।
शांतिपूर्ण मार्च को बलपूर्वक रोका गया। पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई छात्र घायल हुए। छात्रों ने दावा किया कि पुलिस ने डॉ. आंबेडकर की तस्वीर को अपमानित किया। JNUSU ने 14 घंटे से अधिक हिरासत के बाद रिहाई की मांग की और विश्वविद्यालय में हड़ताल का ऐलान किया।
सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें छात्रों द्वारा पुलिसकर्मियों पर हमला, गाली-गलौज और एक छात्र को कैंपस दीवार पर चढ़कर उकसाते दिखाया गया है। पुलिस ने इन वीडियो की जांच शुरू कर दी है और उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।
विवाद कुलपति संतिश्री पंडित के एक पॉडकास्ट में दिए बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने UGC रेगुलेशंस और पिछड़े वर्गों/दलितों के ‘विक्टिमहुड’ पर टिप्पणी की, जिसे छात्र जातिवादी बता रहे हैं। UGC रेगुलेशंस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा रखा है, जिसका हवाला विश्वविद्यालय प्रशासन ने दिया।
परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। छात्र गिरफ्तार साथियों की रिहाई और मांगों पर अड़े हैं, जबकि पुलिस और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं। यह घटना JNU में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को और बढ़ा रही है।
