‘देश में 1975 जैसे तानाशाही हालात’: CJP नेता सौरव दास बोले- फोन जब्त कर सबूत प्लांट कर सकती है पुलिस
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने रविवार को राजधानी के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और भारत के निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोला। CJP के सह-संयोजक एवं प्रवक्ता आशुतोष रांका और वरिष्ठ नेता सौरव दास ने आरोप लगाया कि देश की राजधानी में पिछले 72 घंटों के भीतर लोकतंत्र का गला घोंटा गया है और मौजूदा हालात 1975 के आपातकाल से भी बदतर हो चुके हैं।
‘CEC ज्ञानेश कुमार भाजपा के लिए कर रहे काम’
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आशुतोष रांका ने कहा कि पिछले तीन दिनों में देश में ऐसी अभूतपूर्व घटनाएं हुई हैं जिनकी सामान्य लोकतांत्रिक व्यवस्था में कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि उनका यह संघर्ष सीधे तौर पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है। रांका ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि जिस संवैधानिक संस्था पर देश के लोकतंत्र को बचाने और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी थी, उसने पूरी तरह समझौता कर लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त निष्पक्ष रहने के बजाय सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं।
‘अभिजीत की दादी के निधन पर भी पुलिस संवेदनहीन रही, माइक-कैमरा लेकर बनाया तमाशा’
हिरासत के दौरान हुई घटनाओं का ब्योरा देते हुए रांका ने दिल्ली पुलिस के रवैये पर कड़ा आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि शनिवार को जब पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की दादी का देहांत हुआ, तब भी पुलिस का आचरण बेहद अमानवीय था। उन्होंने बताया कि दीपके लगातार पुलिस से विनती करते रहे कि उनके माता-पिता हृदय रोग से पीड़ित हैं और सदमे में हैं, इसलिए उन्हें गांव में मौजूद चचेरे भाई से बात करने दी जाए। इसके बावजूद पुलिस अधिकारियों का दिल नहीं पसीजा। रांका ने कहा कि सबसे शर्मनाक बात यह रही कि इतनी भावुक और दुखद सूचना देते समय भी दिल्ली पुलिस के जवान कैमरे और माइक लेकर खड़े थे और निजी त्रासदी का भी तमाशा बनाने की कोशिश की गई।
फोन में सबूत प्लांट करने की आशंका, सौरव दास बोले- ‘दिल्ली बनी खुली छावनी’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी नेता सौरव दास ने जांच एजेंसियों द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोनों में फर्जी साक्ष्य प्लांट किए जाने का गंभीर अंदेशा जताया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनके निजी फोन खंगाले हैं और उन्हें डर है कि उनके खिलाफ झूठे सबूत गढ़े जा सकते हैं। दास ने दावा किया कि पूरे शहर में करीब 40 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिल्ली को छावनी बना दिया गया है, जिनमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, बंगाल, कश्मीर और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से बीएसएफ के जवानों को एयरलिफ्ट करके राजधानी लाया गया है।
मेट्रो स्टेशन बंद, ट्रेनें रद्द; आम नागरिकों के जीवन पर पड़ा असर
सौरव दास ने आरोप लगाया कि आंदोलन को बदनाम करने और नकारात्मक माहौल बनाने के लिए जानबूझकर आम लोगों की दिनचर्या को बंधक बनाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, राजधानी एक्सप्रेस समेत लंबी दूरी की ट्रेनों को रोकने और रविवार के दिन जबरन दुकानें बंद कराने का क्या औचित्य था। उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस आम जनता के लिए मुश्किलें खड़ी करके आंदोलन के खिलाफ जनआक्रोश भड़काने की रणनीति पर काम कर रही है, जो पूरी तरह तानाशाही रवैया है।
