डबल इंजन सरकार में भाजपा नेत्री ही नहीं सुरक्षित? करोड़ों की ठगी, ब्लैकमेलिंग और दुष्कर्म के आरोपों ने खड़े किए बड़े सवाल
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सामने आया भाजपा नेत्री से कथित करोड़ों की ठगी, ब्लैकमेलिंग और दुष्कर्म का मामला अब केवल एक आपराधिक घटना भर नहीं रह गया है। यह मामला सीधे तौर पर उस “डबल इंजन सरकार” के दावों पर सवाल खड़ा कर रहा है, जिसमें सुरक्षा, महिला सम्मान और सुशासन की बातें मंचों से लगातार दोहराई जाती हैं। सवाल यह है कि जब सत्ताधारी दल की एक सक्रिय महिला नेत्री ही कथित तौर पर निवेश के नाम पर ठगी, मानसिक प्रताड़ना और दुष्कर्म का शिकार हो सकती है, तब आम महिलाओं और आम जनता की सुरक्षा की स्थिति आखिर कैसी होगी?
फेसबुक फ्रेंडशिप से करोड़ों के लेन-देन तक
मामले के अनुसार बिलासपुर की भाजपा नेत्री की पहचान झारखंड के रांची निवासी कारोबारी संजय सिंह से फेसबुक के जरिए हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और मुलाकातों का दौर शुरू हुआ। आरोपी ने खुद को बड़ा कारोबारी बताते हुए कोल व्यापार, ट्रांसपोर्ट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में मजबूत पकड़ होने का दावा किया। राजनीति और कारोबार के मेल में भरोसे की ऐसी नींव रखी गई कि करोड़ों रुपये का लेन-देन शुरू हो गया।
बताया जा रहा है कि दिसंबर 2024 में आरोपी ने महिला नेत्री के खाते में 15 लाख रुपये ट्रांसफर कर विश्वास जीतने की कोशिश की। इसके बाद जनवरी 2025 से लेकर दिसंबर 2025 तक महिला नेता ने सात किश्तों में करीब 1 करोड़ 57 लाख रुपये निवेश कर दिए। यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर बिना मजबूत कानूनी और आर्थिक सुरक्षा के इतने बड़े स्तर पर लेन-देन कैसे होते रहे? क्या राजनीतिक प्रभाव और निजी संबंधों के भरोसे करोड़ों की डील चल रही थी?
जॉइंट अकाउंट, निजी संबंध और फिर अश्लील मैसेज
महिला नेता के अनुसार दोनों के बीच व्यापारिक साझेदारी बढ़ी और फरवरी 2025 में जॉइंट अकाउंट भी खोला गया। इसके बाद आरोपी का व्यवहार बदलने लगा। उसने अपनी पत्नी से भी महिला नेता की बातचीत करवाई ताकि “पारिवारिक विश्वास” बनाया जा सके। लेकिन इसी बीच आरोपी कथित रूप से व्हाट्सएप पर अश्लील भोजपुरी वीडियो भेजने लगा।
यहां सवाल सिर्फ एक व्यक्ति की मानसिकता का नहीं है, बल्कि उस माहौल का भी है जहां महिलाओं को पहले भरोसे में लिया जाता है और फिर धीरे-धीरे मानसिक दबाव और अश्लीलता के जरिए नियंत्रण की कोशिश की जाती है। क्या यही वह “महिला सम्मान” है जिसकी बातें चुनावी मंचों से की जाती हैं?
बिहार चुनाव प्रचार के दौरान बढ़ा दबाव
पीड़िता का आरोप है कि बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान आरोपी लगातार फोन कर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता रहा। ट्रेन लेट होने पर होटल के वीडियो भेजकर मानसिक दबाव बनाया गया। अगर शिकायत सही है तो यह केवल ब्लैकमेलिंग नहीं बल्कि सुनियोजित मानसिक उत्पीड़न का मामला बनता है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एक महिला नेता को भी इतनी असुरक्षा महसूस करनी पड़ रही थी कि वह लंबे समय तक शिकायत दर्ज नहीं करा सकीं? अगर सत्ता से जुड़ी महिला की यह स्थिति है, तो गांव-कस्बों की सामान्य महिलाएं किस भरोसे कानून व्यवस्था पर विश्वास करें?
एक करोड़ रुपये गायब और सिस्टम खामोश
पीड़िता का दावा है कि दोनों के जॉइंट अकाउंट में 9 अप्रैल 2026 को एक करोड़ रुपये आए और कुछ ही समय बाद पूरी रकम निकाल ली गई। अगर यह आरोप सही है तो यह केवल व्यक्तिगत ठगी नहीं बल्कि आर्थिक अपराध का बड़ा मामला है।
यहां फिर सवाल उठता है कि करोड़ों के ट्रांजेक्शन होने के बावजूद किसी स्तर पर निगरानी क्यों नहीं हुई? क्या राजनीतिक पहचान के कारण ऐसे लेन-देन बिना सवाल के चलते रहे? और अगर एक भाजपा नेत्री को अपने ही कारोबारी साझेदार पर भरोसा कर इतना बड़ा नुकसान उठाना पड़ा, तो आम निवेशकों का क्या हाल होगा?
रायपुर से बिलासपुर तक का सफर और गंभीर आरोप
महिला नेता ने सबसे गंभीर आरोप सितंबर 2025 की घटना को लेकर लगाए हैं। उनके अनुसार रायपुर में आरोपी को 22 लाख रुपये नकद देने के बाद दोनों साथ निकले। रास्ते में रेस्टोरेंट पर रुकने के बाद वे आरोपी की कार में बैठीं। आरोप है कि बिलासपुर पहुंचने से पहले चलती कार में उनके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया गया।
अगर यह आरोप सही हैं तो यह बेहद भयावह स्थिति है। महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकारों के दौर में एक महिला नेता को कथित तौर पर राजनीतिक छवि खराब करने की धमकी देकर चुप रहने को मजबूर किया गया। सवाल उठता है कि क्या सत्ता, पैसा और रसूख अपराधियों के लिए सुरक्षा कवच बन चुके हैं?
आरोपी का पलटवार और वायरल वीडियो
मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी संजय सिंह का वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में उसने खुद को पीड़ित बताते हुए दावा किया कि भाजपा नेत्री ने कोल माइंस दिलाने के नाम पर उससे 80 लाख रुपये लिए थे। उसने यह भी कहा कि महिला नेता के व्हाट्सएप चैट सामने आएंगे तो कई राज खुलेंगे।
अब यह मामला सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आर्थिक धोखाधड़ी और दबाव बनाने के आरोप लगा रहे हैं। लेकिन जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर राजनीति और कारोबार का यह खतरनाक गठजोड़ किस दिशा में जा रहा है?
महिला सुरक्षा के दावों पर बड़ा सवाल
भाजपा लगातार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण की बात करती रही है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियान देशभर में चलाए जाते हैं। लेकिन जब उसी पार्टी की महिला नेता खुद को असुरक्षित महसूस करे, ब्लैकमेलिंग और दुष्कर्म जैसे आरोप लगाए, तो यह पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या सत्ता में बैठे लोग सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं? क्या कानून का डर खत्म हो चुका है? और अगर राजनीतिक पहुंच रखने वाले लोग ही ऐसे मामलों में फंस रहे हैं, तो आम जनता के लिए न्याय की उम्मीद कितनी मजबूत बचती है?
पुलिस जांच जारी, लेकिन जनता जवाब चाहती है
फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और बैंक ट्रांजेक्शन, कॉल रिकॉर्ड, चैट और डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है। लेकिन इस पूरे मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सत्ता, राजनीति, पैसा और निजी संबंधों का गठजोड़ किस तरह गंभीर अपराधों में बदल सकता है।
अब जनता सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि जवाब चाहती है। सवाल यह है कि आखिर “डबल इंजन सरकार” में अगर भाजपा की अपनी महिला नेत्री सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
