छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों का बड़ा आंदोलन: 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों अधिकारी-कर्मचारी
छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों का बड़ा आंदोलन
छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर प्रदेशभर में भोजनावकाश के दौरान व्यापक प्रदर्शन किया गया, जिसका असर राजधानी से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक देखने को मिला।
रायपुर-नवा रायपुर में जोरदार प्रदर्शन
राजधानी रायपुर और नवा रायपुर में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कर्मचारी-अधिकारी शामिल हुए। प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा और महासचिव चंद्रशेखर तिवारी के मार्गदर्शन में कर्मचारियों ने इंद्रावती भवन से निकलकर सड़कों पर रैली निकाली और 11 सूत्रीय मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।
जिलों में भी दिखा आंदोलन का असर
महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद और बलौदाबाजार समेत कई जिलों में भी कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। “अब नई सहिबो, मोदी के गारंटी लेकर रहीबो” जैसे नारों के साथ कर्मचारियों ने सरकार के प्रति नाराजगी जताई।
दुर्ग, बिलासपुर और बस्तर संभाग में भी रैलियां
दुर्ग संभाग में राजनांदगांव, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम और मानपुर-मोहला में रैलियां निकाली गईं। वहीं बिलासपुर संभाग के जांजगीर-चांपा, कोरबा, मुंगेली, रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों में भी कर्मचारी सड़कों पर उतरे। बस्तर संभाग के जगदलपुर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा में भी बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुआ, जिसमें कर्मचारियों और शिक्षकों की भारी भागीदारी रही।
सरगुजा संभाग में भी दिखा जोश
सरगुजा संभाग के अंबिकापुर, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर, जशपुर और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिलों में भी कर्मचारियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
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11 सूत्रीय मांगों को लेकर बढ़ा दबाव
फेडरेशन की प्रमुख मांगों में महंगाई भत्ता एरियर को जीपीएफ खाते में समायोजित करना, 8, 16, 24 और 32 वर्षों में पदोन्नति आधारित वेतनमान देना और अर्जित अवकाश नगदीकरण को 300 दिन तक बढ़ाना शामिल है।
इसके अलावा वेतन विसंगतियों को दूर करने, शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ देने, अनुकंपा नियुक्ति में ढील, पंचायत सचिवों के शासकीयकरण और नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित वेतन देने जैसी मांगें भी उठाई गई हैं।
सेवानिवृत्ति आयु और नियमितीकरण की मांग
फेडरेशन ने कर्मचारियों की कमी को देखते हुए सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण, आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली समाप्त करने और रिक्त पदों पर जल्द भर्ती की भी मांग की है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा है और आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार जल्द मांगों पर निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
