कंप्यूटर ऑपरेटर व सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ का बड़ा ऐलान – 12 माह वेतन और नियमितीकरण की मांग पर अडिग, 24 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत
रायपुर। छत्तीसगढ़ समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ और सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने आरोप लगाया है कि सरकार प्रदेशभर के 2739 धान उपार्जन केंद्रों में कार्यरत ऑपरेटरों को सिर्फ 6 माह का वेतन देने का अन्यायपूर्ण निर्णय ले रही है, जबकि ऑपरेटर पूरे 12 महीने कार्य करते हैं। इसी को लेकर संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर विरोध जताया है और 24 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।
“ऑपरेटर सालभर काम करते हैं, फिर भी 6 माह का वेतन”
संघ के प्रदेश अध्यक्ष ऋषिकांत मोहरे ने कहा कि धान खरीदी की तैयारियां हर साल 1 जुलाई से 31 जनवरी तक चलती हैं, जबकि फाइल अपलोडिंग और भुगतान प्रक्रिया कई महीनों तक जारी रहती है। इसके बावजूद शासन ने वर्ष 2025-26 के लिए केवल 6 माह का वेतन स्वीकृत किया है। यह फैसला पूरी तरह अनुचित और असंवैधानिक है।
अध्यक्ष मोहरे ने आज संघ के पदाधिकारियों के साथ मिलकर कलेक्टोरेट कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम हीतेश्वरी बाघे को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि “18 वर्षों से कंप्यूटर ऑपरेटर न्यूनतम पारिश्रमिक पर काम कर रहे हैं, लेकिन हर बार सरकार की नीतियों से उपेक्षित ही रहते हैं।”
धान खरीदी कर्मियों ने उठाई सुरक्षा और जिम्मेदारी की बात
संघ के जिला कोषाध्यक्ष दिनेश चंद्राकर ने कहा, “हम कर्मचारी धान खरीदी के दौरान दिन-रात मेहनत करते हैं। तीन-तीन महीने तक उठाव नहीं होने से धान में सुखत आना स्वाभाविक है। इसके बावजूद शासन हम पर एफआईआर कर देता है। हमारी मांग है कि धान में सुखत के लिए उचित प्रावधान शासन स्तर पर तय किया जाए।”
संघ ने तय किया आंदोलन का रोडमैप
संघ ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन की रूपरेखा भी घोषित की है।
1️⃣ 24 अक्टूबर 2025: सभी जिलों में जिला मुख्यालयों पर प्रतीकात्मक रैली और ज्ञापन सौंपा जाएगा।
2️⃣ 28 अक्टूबर 2025: संभागीय स्तर पर धरना प्रदर्शन आयोजित होगा।
3️⃣ 3 नवंबर 2025: संभाग स्तर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
4️⃣ 12 नवंबर 2025: यदि तब तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
सरकार को दी चेतावनी
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी कैबिनेट बैठक में 12 माह के वेतन भुगतान और नियमितीकरण पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर के 15 हजार से अधिक समिति कर्मचारी और ऑपरेटर सड़क पर उतर जाएंगे। संघ पदाधिकारियों ने कहा, “हम सालों से प्रदेश की धान खरीदी व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन हर बार सरकार हमें नजरअंदाज करती है। अब हमारा धैर्य जवाब दे चुका है। अगर सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।”
