विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का आरोप, 27 नवंबर को छानबीन समिति करेगी सुनवाई

वाड्रफनगर। प्रतापपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते अपनी जाति प्रमाण पत्र को लेकर गंभीर मुश्किलों से घिरती नजर आ रही हैं। फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में हिला कलेक्टर ने उन्हें प्रमाण पत्र सहित तलब किया है। जिला कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस में विधायक को जाति प्रमाण पत्र से जुड़े सभी मूल दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का सख्त निर्देश दिया गया है। इस मामले में जिला स्तरीय छानबीन समिति 27 नवंबर 2025 को सुनवाई करेगी।

 

हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही जांच

बता दें कि शकुंतला सिंह पोर्ते की जाति के विवाद पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने 17 जून 2025 को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। कोर्ट ने जिला स्तरीय और उच्च स्तरीय छानबीन समितियों को मामले की तत्काल जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके बाद बलरामपुर जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने विधायक को तीन बार नोटिस भेजे 28 अगस्त, 15 सितंबर और 29 सितंबर 2025 को। इन नोटिसों में मूल दस्तावेज और अन्य अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन विधायक की उपस्थिति पर सवाल उठे हैं।

 

आदिवासी समाज का आरोप: पति पक्ष से फर्जी प्रमाण पत्र

दरअसल, यह विवाद तब भड़का जब आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विधायक पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप लगाया। गोंड समाज की जयश्री सिंह ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया कि विधायक ने पति पक्ष से प्रमाण पत्र बनवाकर अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा। समाज का कहना है कि जाति प्रमाण पत्र केवल पिता की जाति पर आधारित होता है, न कि पति पर। साथ ही, आरोप है कि विधायक उत्तर प्रदेश मूल की हैं और उनके परिवार का सेटलमेंट यहां नहीं है, फिर भी आरक्षण का लाभ लिया गया।

 

आदिवासी संगठनों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रमाण पत्र निरस्त नहीं हुआ तो आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। जनपद सदस्य जयसिंह कुसाम ने आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी, जिसमें पुष्टि हुई कि प्रमाण पत्र पति लाल बहादुर के नाम से 2002-03 में जारी किया गया था, जो रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।

 

पूर्व सीएम अजीत जोगी का पुराना मामला याद

छत्तीसगढ़ में जाति विवाद कोई नई बात नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके परिवार पर भी जाति प्रमाण पत्र को लेकर लंबा विवाद चला। मामले ने सुप्रीम कोर्ट तक तहलका मचा दिया था। जोगी पर भी फर्जी प्रमाण पत्र से लाभ लेने का आरोप लगा, जो राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना। वर्तमान मामले ने पुराने घावों को फिर से हरा कर दिया है।

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