आठवीं पास को PA बनाना चाहते थे मंत्री राजेश अग्रवाल, GAD ने किया इनकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों एक अजीब मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, राज्य के कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल अपने निज सहायक (PA) के रूप में आठवीं पास तबरेज आलम को नियुक्त करना चाहते थे, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

GAD ने किया स्पष्ट इनकार

मंत्री राजेश अग्रवाल के विशेष सहायक को भेजे गए पत्र में सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ सचिवालय सेवा भर्ती नियमों के तहत तृतीय श्रेणी पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास होना अनिवार्य है। जबकि तबरेज आलम मात्र आठवीं पास हैं।

इसलिए उनकी नियुक्ति नियमानुसार संभव नहीं है।

GAD ने अपने पत्र में लिखा —

“चूंकि तबरेज आलम की शैक्षणिक योग्यता निर्धारित मानदंड से कम है, अतः उन्हें निज सहायक के रूप में पदस्थापित नहीं किया जा सकता।”

मंत्री की सिफारिश पर शुरू हुआ था मामला

राजेश अग्रवाल ने अपने निजी स्टाफ में तबरेज आलम को निज सहायक के पद पर रखने का प्रस्ताव भेजा था। विभाग ने जब उनके दस्तावेजों की जांच की, तब पता चला कि आलम की योग्यता 8वीं पास है। इसके बाद GAD ने नियमों का हवाला देते हुए नियुक्ति को अस्वीकार कर दिया।

इस निर्णय के बाद विभागीय स्तर पर चर्चा का दौर शुरू हो गया और यह मामला अब राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।

राजेश अग्रवाल: साय कैबिनेट में नए मंत्री

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल को कैबिनेट में शामिल किया गया था। वे सामान्य वर्ग से आने वाले एक प्रभावशाली नेता हैं, जिनकी सरगुजा संभाग में मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती है।

कांग्रेस छोड़कर BJP में आए और टीएस सिंहदेव को हराया

राजेश अग्रवाल पहले कांग्रेस पार्टी में थे, लेकिन 2017 में उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी।

2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव को हराकर सुर्खियां बटोरीं।

उनकी इस जीत के बाद से ही उन्हें मंत्री बनाए जाने की चर्चा तेज हो गई थी, जो आखिरकार हाल ही में पूरी हुई।

नियुक्ति पर उठा सवाल

राजेश अग्रवाल का अपने निजी सहायक के रूप में आठवीं पास व्यक्ति को नियुक्त करने का प्रयास अब विपक्ष और सोशल मीडिया में योग्यता और सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब राज्य सेवा के तृतीय श्रेणी पदों पर भर्ती के लिए कड़े मानदंड तय हैं, तो मंत्री स्तर पर इन नियमों से छूट नहीं दी जा सकती।

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