छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ओम साई बेवरेज के 2 डायरेक्टर EOW रिमांड में
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में एक बार फिर एसीबी/ईओडब्ल्यू (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) ने बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को रायपुर की विशेष अदालत में ओम साईं बेवरेज कंपनी के डायरेक्टर अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा को पेश किया गया। कोर्ट ने सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को 6 सितंबर तक ईओडब्ल्यू की रिमांड पर भेज दिया है। अब जांच एजेंसी शराब घोटाले से जुड़े अहम पहलुओं को सामने लाने के लिए दोनों से सख्त पूछताछ करेगी।
कैसे हुई पेशी?
दरअसल, ईओडब्ल्यू की टीम ने गुरुवार को झारखंड जेल में बंद दोनों आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लिया और रायपुर लेकर आई। शुक्रवार को इन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां न्यायाधीश ने दोनों को छह दिन की रिमांड पर भेजने का आदेश दिया। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ से सिंडिकेट के फंडिंग नेटवर्क, नेताओं-अधिकारियों तक पहुंची रकम और हवाला कनेक्शन के बारे में और खुलासे होंगे।
छठवां चालान दाखिल कर चुके हैं जांच अधिकारी
इससे पहले 26 अगस्त को रायपुर स्थित विशेष अदालत में ईओडब्ल्यू ने छठवां अभियोग पत्र दाखिल किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि ओम साईं बेवरेज से जुड़े विजय कुमार भाटिया को 14 करोड़ रुपये का लाभ पहुंचाया गया। भाटिया ने अलग-अलग बैंक खातों और डमी डायरेक्टरों के जरिए रकम निकालकर सिंडिकेट तक पहुंचाई।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नेक्सजेन पावर इंजिटेक से जुड़े कारोबारी संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह को लगभग 11 करोड़ रुपये की राशि दी गई।
FL-10 लाइसेंस बना घोटाले का आधार
जांच के मुताबिक, शराब घोटाले का आधार FL-10 A और FL-10 B लाइसेंस व्यवस्था थी।
- FL-10 A लाइसेंस – इसके तहत कंपनियों को देश के किसी भी राज्य से विदेशी शराब खरीदकर बेचने का अधिकार था।
- FL-10 B लाइसेंस – केवल राज्य के निर्माताओं से विदेशी ब्रांड की शराब लेकर सप्लाई करने की अनुमति थी।
हालांकि, हकीकत में इन कंपनियों का पूरा काम छत्तीसगढ़ राज्य बेवरेज कॉर्पोरेशन को सौंपा गया। इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर निजी कंपनियों और सिंडिकेट ने करोड़ों का खेल किया।
सिंडिकेट की साजिश और अवैध वसूली
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी और कारोबारी मिलकर एक सिंडिकेट चला रहे थे।
इसमें अनिल टुटेजा (तत्कालीन संयुक्त सचिव), अरुणपति त्रिपाठी (सीएसएमसीएल के एमडी), निरंजन दास, कारोबारी अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह की प्रमुख भूमिका थी।
इस सिंडिकेट ने सरकारी शराब दुकानों से कमीशन वसूला, डिस्टिलरी से अतिरिक्त शराब बनवाई और विदेशी ब्रांड की सप्लाई पर भी अवैध रकम वसूली की।
नकली होलोग्राम वाली शराब की सप्लाई
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, महासमुंद, धमतरी, कोरबा और रायगढ़ सहित कई जिलों में नकली होलोग्राम लगी शराब बेची गई। इस खेल में बोतल सप्लायर, होलोग्राम सप्लायर और कैश कलेक्टरों का पूरा नेटवर्क शामिल था।
सरकार को 248 करोड़ का सीधा नुकसान
अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2020-21 में लागू नई आबकारी नीति के बाद विदेशी शराब सप्लाई का ठेका तीन निजी कंपनियों—ओम साईं बेवरेज प्रा. लि., नेक्सजेन पावर इंजिटेक प्रा. लि. और दिशिता वेंचर्स प्रा. लि.—को दिया गया। इस व्यवस्था से सरकार को लगभग 248 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ।
2,174 करोड़ की बंदरबांट
ईओडब्ल्यू की जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि शराब घोटाले से जुड़ी राशि का 2,174 करोड़ रुपये का बंटवारा किया गया।
- नेताओं-मंत्रियों को : 1,392 करोड़ 45 लाख
- तीन शराब डिस्टिलर्स को : 358 करोड़ 65 लाख
- अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा को : 181 करोड़ 52 लाख
- आबकारी विभाग को : 90 करोड़ 76 लाख
- जिला आबकारी अधिकारी और दुकान कर्मचारियों को : 90 करोड़ 76 लाख
- विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह को : 60 करोड़ 50 लाख
आरोपियों की भूमिकाएं
- अनिल टुटेजा – तत्कालीन संयुक्त सचिव, सिंडिकेट संरक्षक।
- अनवर ढेबर – होटल कारोबारी, सिंडिकेट का गठन और पैसों का बंटवारा।
- एपी त्रिपाठी – CSMCL के एमडी, नकली होलोग्राम सप्लाई और कैश कलेक्शन का जिम्मा।
- विकास अग्रवाल – नकली होलोग्राम वाली शराब की सप्लाई और वसूली।
- अरविंद सिंह – पत्नी के नाम बोतल प्लांट, नकली बोतल व होलोग्राम की सप्लाई।
- त्रिलोक सिंह ढिल्लन – शराब ठेकेदार व होटल कारोबारी, अपनी कंपनियों से धन इकट्ठा कर संपत्ति में लगाया।
सिंडिकेट का नेटवर्क
जांच रिपोर्ट में कई और नाम सामने आए हैं। इनमें सिद्धार्थ सिंघानिया (डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब की बिक्री), सत्येंद्र प्रकाश गर्ग और नवनीत गुप्ता (बोतल सप्लाई), विद्यु गुप्ता (होलोग्राम सप्लाई), सोहन वर्मा और पीयूष बिजलानी (कैश कलेक्शन), नवीन केडिया, भूपेंद्र पाल सिंह भाटिया और राजेन्द्र जायसवाल (शराब सप्लाई) शामिल हैं।
हवाला कारोबारियों सुमित मालू और रवि बजाज पर भी सिंडिकेट का पैसा दूसरे राज्यों में भेजने के आरोप हैं।
आबकारी अधिकारी भी लिप्त
जांच के दायरे में कई आबकारी अधिकारी भी आए। इनमें उपायुक्त से लेकर जिला आबकारी अधिकारी तक शामिल हैं। आरोप है कि ये अधिकारी नकली होलोग्राम और शराब की अवैध बिक्री में सहयोग कर रहे थे। जांच के बाद 20 से अधिक अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
ED की जांच में 3,200 करोड़ का घोटाला
ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने भी इस घोटाले में अलग से जांच शुरू की है। ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, शराब घोटाले का आकार 3,200 करोड़ रुपये से अधिक का है। एजेंसी ने दावा किया है कि यह पूरा नेटवर्क पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में सक्रिय था और इसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था।
