छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : सुप्रीम कोर्ट से आबकारी अधिकारियों को बड़ी राहत, शर्तों के साथ मिली अग्रिम जमानत
रायपुर। देश के सबसे बड़े शराब घोटालों में से एक माने जा रहे छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में फंसे आबकारी विभाग के अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में अदालत ने 28 अधिकारियों को शर्तों के साथ अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। इनमें 6 पूर्व अधिकारी भी शामिल हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर महीने में होगी।
32 सौ करोड़ का घोटाला – EOW का दावा
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में दावा किया है कि राज्य में 3,200 करोड़ रुपये से अधिक का शराब घोटाला हुआ। शुरुआती अनुमान 2,100 करोड़ रुपये का लगाया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 3,200 करोड़ कर दिया गया।
EOW के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच यह घोटाला हुआ और इसमें आबकारी विभाग से जुड़े 29 अधिकारी सीधे शामिल पाए गए। इन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सभी आरोपित अधिकारियों को 20 अगस्त को निचली अदालत में पेश होना था। इससे पहले उन्होंने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की, जिसे 18 अगस्त को खारिज कर दिया गया। इसके बाद सभी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी आरोपियों को अग्रिम जमानत देते हुए यह शर्त रखी कि वे जांच में सहयोग करेंगे और बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाएंगे।
आरोपित अधिकारियों के नाम
जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में आबकारी विभाग के कई अधिकारियों को आरोपी बनाया है। इनमें से 9 अधिकारी रिटायर हो चुके हैं, जबकि 22 को सरकार ने निलंबित कर दिया। आरोपियों में प्रमुख नाम इस प्रकार हैं –
- जनार्दन कौरव, सहायक जिला आबकारी अधिकारी
- अनिमेष नेताम, उपायुक्त आबकारी
- विजय सेन शर्मा, उपायुक्त आबकारी
- अरविंद कुमार पाटले, उपायुक्त आबकारी
- प्रमोद कुमार नेताम, सहायक आयुक्त आबकारी
- रामकृष्ण मिश्रा, सहायक आयुक्त आबकारी
- विकास कुमार गोस्वामी, सहायक आयुक्त आबकारी
- इकबाल खान, जिला आबकारी अधिकारी
- नितिन खंडुजा, सहायक जिला आबकारी अधिकारी
- नवीन प्रताप सिंह तोमर, सहायक आयुक्त आबकारी
- मंजुश्री कसेर, सहायक आबकारी अधिकारी
- सौरभ बख्शी, सहायक आयुक्त आबकारी
- दिनकर वासनिक, सहायक आयुक्त आबकारी
- मोहित कुमार जायसवाल, जिला आबकारी अधिकारी
- नीतू नोतानी ठाकुर, उपायुक्त आबकारी
- गरीबपाल सिंह दर्दी, जिला आबकारी अधिकारी
- नोहर सिंह ठाकुर, उपायुक्त आबकारी
- सोनल नेताम, सहायक आयुक्त आबकारी
- प्रकाश पाल, सहायक आयुक्त आबकारी
- अलेख राम सिदार, सहायक आयुक्त आबकारी
- आशीष कोसम, सहायक आयुक्त आबकारी
इसके अलावा ए.के. सिंह, जे.आर. मंडावी, जी.एस. नुरुटी, देवलाल वैद्य, ए.के. अनंत, वेदराम लहरे और एल.एल. ध्रुव जैसे सेवानिवृत्त अधिकारी भी आरोपी बनाए गए हैं।
क्या है “बी-पार्ट शराब घोटाला”?
इस घोटाले का सबसे बड़ा हिस्सा बी-पार्ट शराब घोटाला कहलाता है। वर्ष 2019 से 2023 के बीच राज्य के 15 बड़े जिलों में कार्यरत आबकारी अधिकारियों ने डिस्टिलरी से शराब लेकर उसे सरकारी दुकानों में गुप्त तरीके से समानांतर बेचना शुरू किया।
- इस शराब को “बी-पार्ट शराब” नाम दिया गया।
- इसमें बिना ड्यूटी चुकाए शराब की पैकेजिंग और सप्लाई की जाती थी।
- हर महीने हजारों पेटी शराब की खपत होती रही और उससे कमाए गए करोड़ों रुपये सीधे सिंडिकेट तक पहुंचाए जाते थे।
EOW का अनुमान है कि इस दौरान 60 लाख से अधिक पेटियां बेची गईं, जिसकी कीमत 2,174 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
घोटाले में शामिल नेटवर्क
इस अवैध कारोबार में केवल अधिकारी ही नहीं, बल्कि डिस्टिलरी मालिक, ट्रांसपोर्टर, सेल्समैन, सुपरवाइजर और मैनपावर एजेंसी के कर्मचारी भी शामिल पाए गए। पूरा नेटवर्क व्यवस्थित तरीके से चल रहा था।
प्रमुख आरोपी पहले से जेल में
इस घोटाले में कई बड़े नाम पहले से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। इनमें –
- पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा
- पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल
- सेवानिवृत्त IAS अनिल टूटेजा
- होटल कारोबारी अनवर ढेबर
सहित 15 लोग शामिल हैं। EOW ने अब तक 70 से अधिक व्यक्तियों को आरोपित बनाया है, जिनमें आठ डिस्टिलरी संचालक भी हैं।
