सावधान! होली को बेरंग न कर दें कैमिकल रंग, बढ़ सकता है एलर्जी का खतरा
रायपुर। रंगों का त्योहार होली उल्लास और उमंग का प्रतीक है, लेकिन बाजार में उपलब्ध रसायन युक्त रंग इस उत्साह में बाधा बन सकते हैं। नेत्र और त्वचा रोग विशेषज्ञों ने इन रंगों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई है। डॉक्टरों के अनुसार, रसायनों से बने रंग आंखों की रोशनी तक को प्रभावित कर सकते हैं और त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
आंखों पर रसायनों का कहर
नेत्र रोग विभाग के चिकित्सकों का कहना है कि रसायन युक्त रंगों के आंखों में जाने से एलर्जिक रिएक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर आंख के सबसे संवेदनशील हिस्सों कॉर्निया और कंजंक्टिवा पर पड़ता है।
डॉक्टरों ने बताया कि रंग के कण आंख के अंदर चले जाने के बाद अगर तुरंत आंखों को मसल दिया जाए, तो कॉर्निया पर घाव भी पैदा हो सकता है। रंग जाने के बाद आंखों में जलन, लालिमा, खुजली और पानी आना प्राथमिक लक्षणों के रूप में सामने आते हैं। ऐसे में लोगों को होली खेलते समय विशेष सजगता बरतने की आवश्यकता है।
त्वचा को भी खतरा
त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, रसायन वाले रंगों के संपर्क में आने से एसीडी (एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस) नामक संक्रमण हो सकता है। इसके कारण त्वचा पर लाल दाने उभर आते हैं, खुजली होती है और त्वचा का बाहरी परत छिलने या निकलने लगती है। छोटे बच्चों की त्वचा विशेष रूप से संवेदनशील होती है, इसलिए उन्हें पक्के या रसायनिक रंगों से दूर रखना चाहिए।
ऐसे रखें आंखों का ख्याल
1. हर्बल रंग चुनें: हमेशा प्राकृतिक और हर्बल रंगों से ही होली खेलें। बाजार में मिलने वाले चमकीले रंगों में अक्सर सीसा, मोमबत्ती और अन्य जहरीले रसायन होते हैं।
2. चश्मे का इस्तेमाल करें: होली खेलते समय धूप के चश्मे या सुरक्षात्मक चश्मे का इस्तेमाल करें। यह आंखों को सीधे रंग के कणों से बचाएगा।
3. साफ पानी से धुलें: अगर आंखों में रंग चला जाए, तो उसे मसलें नहीं, बल्कि तुरंत ठंडे और साफ बहते पानी से आंखों को अच्छी तरह धुलें।
4. मसलने से बचें: आंखों में रंग जाने के बाद उन्हें मसलने की गलती न करें, इससे कॉर्निया को नुकसान पहुंच सकता है।
ऐसे रखें त्वचा का ख्याल
1. शरीर को ढकें: होली खेलते समय पूरी बाजू के कपड़े पहनें ताकि त्वचा का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा ढका रहे।
2. मॉइस्चराइजर लगाएं: होली खेलने से पहले चेहरे और शरीर पर अच्छी मात्रा में मॉइस्चराइजर या नारियल तेल लगाएं। इससे त्वचा पर रंग चिपकेगा नहीं और बाद में आसानी से छूट जाएगा।
3. बच्चों का ध्यान रखें: छोटे बच्चों को पक्के रंगों से दूर रखें और उनकी त्वचा के लिए विशेष रूप से सुरक्षित, मुलायम हर्बल रंगों का इस्तेमाल करें।
घर पर बनाएं प्राकृतिक हर्बल रंग (Homemade Herbal Colours)
बाजार के केमिकल युक्त रंगों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप घर पर ही प्राकृतिक चीजों से रंग तैयार करें। ये रंग त्वचा और आंखों दोनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित होते हैं और इन्हें बनाना भी बेहद आसान है।
1. गुलाल (लाल/गुलाबी रंग)
सामग्री: सूखा हुआ चंदन पाउडर, लाल चंदन (रक्त चंदन) या फिर गुलाब की सूखी पंखुड़ियां।
विधि: गुलाब की सूखी पंखुड़ियों को मिक्सी में पीसकर बारीक पाउडर बना लें। इसमें थोड़ा सा चंदन पाउडर या बेसन मिलाकर छान लें। इससे सुगंधित और सुरक्षित गुलाल तैयार हो जाएगा। अधिक गहरे लाल रंग के लिए, सूखे चुकंदर (बीटरूट) के पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
2. हरा रंग
सामग्री: मेंहदी की पत्तियां, पालक या धनिया।
विधि: मेंहदी की पत्तियों या पालक को छाया में सुखाकर बारीक पाउडर बना लें। यह न केवल हरा रंग देगा बल्कि बालों और त्वचा के लिए फायदेमंद भी होगा। सूखी धनिया की पत्तियों का पाउडर भी अच्छा हरा रंग देता है।
3. पीला रंग
सामग्री: हल्दी पाउडर, बेसन और चंदन।
विधि: हल्दी पाउडर में थोड़ा सा बेसन और चंदन मिलाकर पीला और त्वचा के लिए फायदेमंद रंग तैयार किया जा सकता है। ध्यान रखें, हल्दी से कपड़ों पर पीला दाग लग सकता है, लेकिन यह त्वचा के लिए बिल्कुल सुरक्षित है।
4. नीला रंग
सामग्री: जकारंडा के फूल या नीले रंग के अन्य प्राकृतिक फूल।
विधि: नीले रंग के सूखे फूलों (जैसे नीले गुड़हल या जकारंडा) को पीसकर बारीक पाउडर बना लें और चावल के आटे या बेसन के साथ मिलाकर इस्तेमाल करें।
गीले रंग (पानी वाले रंग) के लिए
केसरिया/पीला: ताजी हल्दी को पानी में उबालकर या भिगोकर पीला पानी तैयार करें।
लाल: चुकंदर (बीटरूट) को उबालकर उसका पानी लाल गीले रंग के रूप में इस्तेमाल करें।
हरा: पालक या मेंहदी की पत्तियों को पीसकर पानी में मिलाकर हरा रंग तैयार करें।
चिकित्सकों की सलाह
अगर रंग हटाने के बाद भी आंखों में जलन या त्वचा पर एलर्जी बनी रहती है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। होली के इस पावन पर्व को सुरक्षित और आनंददायक बनाएं और रसायनों से दूर रहकर प्रकृति के साथ खेलें।
