CGMSC Scam : मोक्षित कार्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा को ED ने किया गिरफ्तार

रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) में हुए 660 करोड़ रुपये के रीएजेंट घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा कदम उठाया है। जेल में बंद मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक और मुख्य आरोपी शशांक चोपड़ा को ईडी ने प्रोडक्शन वारंट पर कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए 19 जनवरी तक पुलिस रिमांड हासिल की है। यह ईडी द्वारा शशांक चोपड़ा की पहली गिरफ्तारी है, जबकि वह पहले से ही ईओडब्ल्यू (एकोनॉमिक ऑफेंस विंग) के मामले में जेल में बंद है। ईडी ने उसे इस मामले का मास्टरमाइंड बताया है।

 

ईडी की जांच मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत चल रही है, जो ईओडब्ल्यू की जांच के साथ समानांतर है। ईडी ने पहले 30-31 जुलाई 2025 को मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टरों और जुड़े 20 ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर शामिल थे। अगस्त 2025 में ईडी ने शशांक चोपड़ा और उनके रिश्तेदारों की 40 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की चल-अचल संपत्तियां अटैच की थीं, जिनमें दो लग्जरी कारें (पोर्श केयेन कूप और मर्सिडीज-बेंज), बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट और डीमैट अकाउंट शामिल थे।

 

घोटाले का खुलासा कांग्रेस शासनकाल (2022-2023) में हुआ था, जब सीजीएमएससी ने मोक्षित कॉर्पोरेशन के साथ मिलीभगत कर रीएजेंट और मेडिकल उपकरण महंगे दामों पर खरीदे। उदाहरण के तौर पर, बाजार में 8 रुपये की EDTA ट्यूब 2,352 रुपये में और 5 लाख की CBC मशीन 17 लाख में खरीदी गई। जरूरत से ज्यादा रीएजेंट खरीदे गए, जिनकी एक्सपायरी सिर्फ 2-3 महीने बची थी, जिससे लाखों का नुकसान हुआ। कई मशीनें इंस्टॉल नहीं हुईं या लॉक कर दी गईं। ईओडब्ल्यू ने जनवरी 2025 में शशांक को गिरफ्तार किया था और कई बार रिमांड पर लिया, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं।

 

ईडी की इस नई रिमांड से घोटाले में शामिल अन्य आरोपियों जिनमें IAS, IFS और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल हैं उनपर पर शिकंजा कस सकता है। जांच में आगे गिरफ्तारियां और संपत्ति अटैचमेंट की संभावना है। यह मामला छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी मेडिकल सप्लाई घोटाला जांचों में से एक है, जिसमें अब तक कई अधिकारी और कारोबारी जेल में हैं।

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