Budget 2026 Electronics Scheme: बजट 2026 में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को बूस्टर डोज, क्या मोबाइल-टीवी-AC होंगे सस्ते?

Budget 2026 Electronics Scheme: केंद्रीय बजट 2026 का ऐलान हो चुका है और इस बार सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट इंडस्ट्री को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए 40 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे भारत में ही टीवी, स्मार्टफोन, वॉशिंग मशीन, एसी और अन्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स बनाए जाएंगे।

वित्त मंत्री ने बताया कि इस स्कीम के तहत खर्च को लगभग दोगुना कर दिया गया है। पहले इसके लिए 22,919 करोड़ रुपये तय किए गए थे, जिसे अब बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का उद्देश्य देश की घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करना और विदेशी आयात पर निर्भरता को कम करना है।

घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

इस भारी-भरकम बजट से भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को मजबूती मिलेगी। इसके चलते न सिर्फ देश में ही जरूरी पार्ट्स तैयार होंगे, बल्कि विदेशी कंपनियां भी भारत में अपने प्लांट लगाने के लिए आगे आएंगी। इससे निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

मोबाइल, टीवी और AC की कीमतों पर असर?

इस स्कीम के तहत स्मार्टफोन, लैपटॉप, माइक्रोवेव, फ्रिज, टोस्टर जैसे घरेलू उपकरणों के लिए जरूरी कंपोनेंट्स देश में ही तैयार किए जाएंगे। इससे इन उत्पादों के निर्माण में लागत घट सकती है। अगर मैन्युफैक्चरर्स को सस्ते कंपोनेंट्स मिलते हैं, तो आने वाले समय में मोबाइल, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।

अब तक 46 आवेदनों को मिली मंजूरी

सरकार के अनुसार, इस स्कीम के तहत अब तक 46 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें कुल 54,567 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। इससे लगभग 51 हजार लोगों को सीधे रोजगार मिलने की संभावना है। आईटी मंत्रालय ने हाल ही में Foxconn, Tata Electronics, Samsung, Dixon Technologies और Hikalco Industries जैसी कंपनियों के 22 आवेदनों को मंजूरी दी है।

किन कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस

इस योजना के तहत डिस्प्ले मॉड्यूल सब-असेंबली, कैमरा मॉड्यूल, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली (PCBA), लिथियम सेल एनक्लोजर, रेजिस्टर, कैपेसिटर और फेराइट्स जैसे अहम इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। इनका इस्तेमाल स्मार्टफोन, लैपटॉप और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में होता है।

PLI से अलग है ये स्कीम

इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, सरकार की पहले की PLI स्कीम से अलग है। जहां PLI में इंसेंटिव प्रोडक्शन से जुड़ा होता है, वहीं इस नई स्कीम में इंसेंटिव तीन आधारों पर तय किया जाएगा—सालाना रोजगार सृजन, पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) और सालाना उत्पादन।

सरकार का लक्ष्य Apple और Samsung जैसी कंपनियों के जरिए भारत में वैल्यू एडिशन को मौजूदा 15-20 फीसदी से बढ़ाकर 30-40 फीसदी तक ले जाना है।

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