ट्रंप को H-1B वीजा पर दूसरा झटका! बोस्टन कोर्ट ने 1 लाख डॉलर फीस को कहा गैरकानूनी, भारतीयों को मिली राहत

H-1B visa fee cancelled

जज लियो सोरोकिन ने कहा- यह टैक्स है, कांग्रेस की मंजूरी के बिना नहीं लगा सकते ट्रंप, सरकार ने कहा- अपील करेंगे

 

बोस्टन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक के बाद एक झटके लगने का दौर जारी है। पिछले दिनों अमेरिका ट्रेड कोर्ट ने 10% ग्लोबल टैरिफ को अमान्य कर दिया था। अब H-1B वीजा को लेकर ट्रंप प्रशासन को बोस्टन की संघीय अदालत से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने ट्रंप के उस फैसले को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया, जिसमें नए H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) की भारी फीस लगाने का प्रावधान था ।

 

बोस्टन की अदालत के जज लियो सोरोकिन ने सोमवार को यह अहम फैसला सुनाया। यह मामला 20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर मुकदमे के बाद अदालत पहुंचा था ।

 

अदालत ने फीस को क्यों कहा गैरकानूनी?

जज लियो सोरोकिन ने फैसला सुनाते हुए साफ कहा कि H-1B वीजा पर ली जाने वाली 1 लाख डॉलर की यह फीस जुर्माना नहीं बल्कि एक टैक्स है । अमेरिका में नया टैक्स लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास होता है। ट्रंप प्रशासन के पास इसे लागू करने का कोई अधिकार नहीं था ।

 

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अमेरिकी विदेश विभाग और अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) इस नीति को लागू नहीं कर सकते। जज ने यह भी कहा कि वीजा को लेकर यह नीति ट्रंप के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा सहित प्रमुख पब्लिक सेक्टरों के लिए हानिकारक होगी ।

 

क्या था ट्रंप का फैसला?

ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में H-1B वीजा के लिए 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस लगाने की घोषणा की थी । इससे पहले एक कंपनी को किसी विदेशी कर्मचारी के लिए H-1B आवेदन पर करीब 2,000 से 5,000 डॉलर तक खर्च करने पड़ते थे । नई नीति के तहत यह रकम सीधे 1 लाख डॉलर हो गई थी।

 

ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि कुछ कंपनियां H-1B वीजा का गलत इस्तेमाल कर रही हैं और विदेशी कर्मचारियों को कम सैलरी पर रखकर अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीनी जा रही हैं ।

 

इस फैसले से भारतीयों को क्यों मिली राहत?

H-1B वीजा स्किल्ड भारतीयों के लिए अमेरिका में काम करने का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। हर साल जारी होने वाले अधिकांश H-1B वीजा भारतीय नागरिकों को ही मिलते हैं। आंकड़ों के अनुसार, अप्रूव्ड H-1B वीजा में से 70 फीसदी से ज्यादा वीजा भारतीय प्रोफेशनल्स को मिलते हैं ।

 

इस कार्यक्रम के तहत सालाना 65,000 वीजा जारी किए जाते हैं। साथ ही उच्च शिक्षा प्राप्त कामगारों के लिए 3 से 6 साल के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा भी दिए जाते हैं ।

 

नई फीस के कारण कई कंपनियों ने H-1B वीजा के लिए आवेदन करना कम कर दिया था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नई फीस लागू होने के बाद फरवरी तक केवल 85 आवेदन ही जमा हुए थे ।

 

सरकार बोली- अपील करेंगे

हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने एक बयान में कहा कि ट्रंप प्रशासन को भरोसा है कि अपील पर यह आदेश पलट दिया जाएगा ।

 

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि अदालत ट्रंप प्रशासन के ऐतिहासिक आव्रजन सुधारों में बाधा डाल रही है ।

 

 

H-1B visa fee cancelled

 

भारतीय प्रवासी समूहों ने किया स्वागत

अमेरिका में भारतीय प्रवासी समूहों ने इस फैसले का स्वागत किया है। इंडियास्पोरा के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा ने कहा कि H-1B वीजा से जुड़े सभी पक्षों को इस अदालती आदेश के बाद राहत मिलेगी ।

 

फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) के खंडेराव कांड ने कहा कि यह फैसला रोजगार-आधारित आव्रजन प्रणाली में विश्वास और निष्पक्षता को बहाल करता है ।

 

हालांकि, यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स का एक और मुकदमा वॉशिंगटन डीसी की अदालत में लंबित है। इसके अलावा सैन फ्रांसिस्को की अदालत में भी धार्मिक समूहों और श्रम संगठनों द्वारा मुकदमा दायर किया गया है । अब देखना यह होगा कि अपील में क्या फैसला आता है और क्या ट्रंप प्रशासन इस भारी फीस को फिर से लागू कर पाता है या नहीं।

 

Read more- 

Donald Trump on Iran: ट्रंप की ईरान को बड़ी चेतावनी, बोले- ‘घड़ी की टिक-टिक शुरू हो चुकी है

 

Youthwings