बड़ी खबर: भाजपा नेता ने की इच्छा मृत्यु की मांग! मुख्यमंत्री से मदद की गुहार

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व मंडल महामंत्री विशंभर यादव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। दरअसल, दो साल पहले रायपुर में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में कार्यकर्ताओं को लेकर जाते समय उनकी बस बेमेतरा के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में यादव गंभीर रूप से घायल हो गए और अब वह स्थायी विकलांगता के शिकार हैं।

हादसे के बाद से बिस्तर पर हैं विशंभर यादव

जानकारी के मुताबिक, दुर्घटना के बाद उन्हें रायपुर के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था और बाद में एयर एंबुलेंस से दिल्ली के एम्स ले जाया गया। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से उनके प्रति सहानुभूति व्यक्त की थी और प्रदेश के बड़े भाजपा नेता भी उनका हालचाल लेने पहुंचे थे। लेकिन उसके बाद से लगातार दो वर्षों से उनका इलाज और देखभाल की जिम्मेदारी परिवार ही उठा रहा है

यादव ने बताया कि अब तक उनके इलाज में 30 से 35 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। उनकी सारी बचत और संसाधन खत्म हो गए हैं। इलाज का खर्चा उठाते-उठाते उनका परिवार आर्थिक तंगी का सामना कर रहा है और अब उनकी स्थिति भी लगातार बिगड़ती जा रही है।

भाजपा नेता ने कही दिल की बात

विशंभर यादव ने कहा,

“मैं शरीर से पूरी तरह असहाय हो चुका हूं। मेरे कारण परिवार भी परेशान है। जिस पार्टी के लिए मैंने अपना जीवन लगा दिया, वहीं से कोई सहयोग नहीं मिला। अब मेरे पास मौत के सिवा कुछ विकल्प नहीं है, इसलिए मैंने मुख्यमंत्री से इच्छा मृत्यु की मांग की है।”

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा अब पहले जैसी पार्टी नहीं रही। पहले कार्यकर्ताओं का सम्मान होता था, लेकिन आज उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

परिवार का दर्द और संगठन से अपील

विशंभर यादव की पत्नी ने भी संगठन से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि परिवार अब इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है।

“हमारी पूरी जमा-पूंजी इलाज में खर्च हो गई। हम चाहते हैं कि पार्टी इनके इलाज का जिम्मा ले। हमारा परिवार शुरू से भाजपा से जुड़ा है और पूरी तरह समर्पित रहा है। लेकिन अब स्थिति ऐसी है कि घर चलाना भी मुश्किल हो गया है।”

उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद उम्मीद थी कि अब उनकी सुनवाई होगी, लेकिन सरकार बनने के बाद भी कोई नेता हालचाल पूछने तक नहीं आया।

बड़ा सवाल: कार्यकर्ताओं की उपेक्षा या संगठन की चूक?

यह मामला सिर्फ एक घायल नेता का नहीं, बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं की भावनाओं से जुड़ा है, जो सालों तक पार्टी के लिए बिना किसी स्वार्थ के काम करते हैं। विशंभर यादव का यह कदम भाजपा संगठन और उसकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है कि क्या पार्टी अपने समर्पित कार्यकर्ताओं की सुध नहीं ले रही?

Youthwings