भारतमाला मुआवजा घोटाला: दो पूर्व तहसीलदार गिरफ्तार, 20 फरवरी तक रिमांड
भारतमाला मुआवजा घोटाला
रायपुर: भारतमाला परियोजना के जमीन अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) और एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) ने बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को अभनपुर के तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और गोबरा नवापारा के तत्कालीन नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
20 फरवरी तक रिमांड मंजूर
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से ईओडब्ल्यू और एसीबी की टीम ने पूछताछ के लिए 20 फरवरी तक रिमांड हासिल किया है। छापेमारी की कार्रवाई के बाद दोनों अधिकारी फरार हो गए थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने कानूनी प्रयास किए, लेकिन जांच एजेंसियों की कार्रवाई से बच नहीं सके।
कुर्की की कार्रवाई भी लंबित
ईओडब्ल्यू और एसीबी ने विशेष न्यायालय में फरार आरोपियों और अन्य लोकसेवकों के खिलाफ आवेदन प्रस्तुत किया था। अदालत ने उनके विरुद्ध स्थायी गिरफ्तारी वारंट और उद्घोषणा जारी की है। साथ ही, उनकी संपत्ति की कुर्की के लिए भी प्रकरण विशेष न्यायालय में विचाराधीन है।
भूमाफिया के साथ मिलकर साजिश का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, रायपुर-विशाखापट्नम और दुर्ग बायपास भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण में गड़बड़ी की गई। आरोप है कि शशिकांत कुर्रे और लखेश्वर प्रसाद किरण ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आपराधिक षड्यंत्र रचा। दोनों अधिकारियों ने अपने अधीनस्थ पटवारी, राजस्व निरीक्षक और भूमाफिया के साथ मिलकर कूटरचित राजस्व दस्तावेज तैयार कराए। इसके जरिए प्रभावित भू-स्वामियों को वास्तविक मुआवजे से कई गुना अधिक राशि दिलाई गई, जिससे शासन को करोड़ों रुपए की आर्थिक क्षति हुई।
43 करोड़ का घोटाला, 10 आरोपी
जमीन अधिग्रहण से जुड़े इस मामले में करीब 43 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप है। इस प्रकरण में पांच लोकसेवकों सहित कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है।घोटाले के सामने आने के बाद 78 करोड़ रुपए के भुगतान का उल्लेख भी जांच में सामने आया है। बताया गया है कि जमीन दलालों के साथ मिलकर जमीन को टुकड़ों में बांटकर एनएचएआई के समक्ष प्रस्तुत किया गया और इस तरह कथित तौर पर हेराफेरी की गई। मामले की जांच ईओडब्ल्यू, एसीबी के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कर रहा है।
पूर्व तहसीलदार निलंबित
अभनपुर के तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, जो वर्तमान में कोरबा में डिप्टी कलेक्टर पद पर पदस्थ थे, उन्हें मामले के उजागर होने के बाद निलंबित कर दिया गया था। जांच एजेंसियां अब रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों से विस्तृत पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।
