PLGA वीक की घोषणा के बाद हाई अलर्ट, नक्सलियों ने पहली बार माना 320 साथियों का नुकसान
जगदलपुर। नक्सल संगठन द्वारा हर साल मनाए जाने वाले पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) सप्ताह की घोषणा के बाद छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी तैयारियां चरम पर पहुंचा दी हैं। संगठन ने 2 से 8 दिसंबर तक PLGA वीक मनाने का ऐलान किया है, साथ ही पूरे देश में बंद की धमकी भी दी है। इस बार नक्सलियों के बयान का केंद्र बिंदु उनकी कमजोरियों और भारी नुकसान पर है, जो संगठन के मनोबल में गिरावट का संकेत दे रहा है।
नक्सलियों का पहला खुलासा: 11 महीनों में 320 साथी शहीद
नक्सल संगठन ने अपनी बुकलेट में खुलासा किया है कि पिछले 11 महीनों में विभिन्न मुठभेड़ों में उनके करीब 320 सदस्य मारे गए हैं, जिनमें अधिकांश दंडकारण्य जोन के थे। यह पहली बार है जब नक्सली इतने बड़े पैमाने पर अपने नुकसान को स्वीकार कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इसे संगठन में बढ़ती अस्थिरता और कमजोरी का प्रमाण मान रही हैं। 2025 में अब तक बस्तर में 2,200 से अधिक कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है, जिसमें PLGA के कई सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा, केंद्रीय नेतृत्व भी सिमटकर मात्र 13 सदस्यों तक रह गया है, जिसमें कई शीर्ष कमांडर मारे जा चुके हैं।
गश्त, सर्च ऑपरेशन और ट्रिगर मोड में जवान
बंद की धमकी के बाद बस्तर को हाई अलर्ट पर रखा गया है। बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि PLGA वीक के दौरान किसी बड़ी घटना को रोकने के लिए गश्त, सर्च ऑपरेशन और एंटी-नक्सल अभियान तेज कर दिए गए हैं। सुरक्षा बलों को ट्रिगर मोड में रखा गया है, जबकि अंदरूनी इलाकों – खासकर अबूझमाड़ और दंडकारण्य के जंगलों – पर विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है। आईजी ने कहा, “नक्सलवाद के दिन गिने-चुने हैं। हम विकास और संवाद के साथ आत्मसमर्पण नीति को मजबूत कर रहे हैं।”
2025 में बस्तर में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर मात्र 6 रह गई है, जो 2018 के 35 से काफी कम है। अप्रैल 2025 में कर्रेगुट्टा हिल्स में 24,000 जवानों ने 1,000 नक्सलियों को घेरा था, जिसमें कई हाइडआउट और हथियार बरामद हुए। हाल ही में सुकमा में 15 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें PLGA के 9 कैडर शामिल थे।

PLGA वीक का इतिहास और नक्सलियों की रणनीति
PLGA को 2000 में नक्सलियों ने अपनी ‘क्रांतिकारी सेना’ के रूप में स्थापित किया था। हर साल दिसंबर में मनाया जाने वाला यह सप्ताह संगठन के ‘शहीदों’ को समर्पित होता है, लेकिन अक्सर इसमें हमले और बंद की अपील शामिल होती है। इस बार नुकसान के खुलासे से लगता है कि नक्सली प्रोपेगैंडा के जरिए मनोबल बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित है।
स्थानीय लोग और सुरक्षा बल सतर्क हैं। आईजी सुंदरराज ने अपील की कि ग्रामीण किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना दें। बस्तर में शांति की दिशा में यह सप्ताह निर्णायक साबित हो सकता है।
