Bastar Naxal Surrender 2026 : बस्तर में नक्सलियों की उलटी गिनती शुरू, आखिरी मौके के बावजूद 5 अंडरग्राउंड

Bastar Naxal Surrender 2026

बस्तर में माओवाद अंतिम दौर में, IG ने दी चेतावनी। बचे नक्सलियों के पास सरेंडर का आखिरी मौका।

 

Bastar Naxal Surrender 2026 के बीच छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से एक बड़ी तस्वीर सामने आ रही है। वर्षों से सक्रिय माओवादी नेटवर्क अब तेजी से सिमटता नजर आ रहा है और यह अपने अंतिम चरण में पहुंचता दिख रहा है।

 

हालांकि, इस गिरते नेटवर्क के बीच कुछ गिने-चुने कट्टर माओवादी अब भी हथियार डालने को तैयार नहीं हैं और सुरक्षा बलों को चुनौती दे रहे हैं।

 

बड़े कमांडरों के सरेंडर से बदली स्थिति

 

हाल के महीनों में माओवादी संगठन को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब कई बड़े कमांडरों ने आत्मसमर्पण किया। जगदलपुर में माओवादी कमांडर पापाराव और तेलंगाना में PLGA इंचार्ज सोढ़ी केसा के सरेंडर के बाद संगठन की पकड़ काफी कमजोर हुई है।

 

इन सरेंडरों के बाद Bastar Naxal Surrender की प्रक्रिया को और गति मिली है और सक्रिय माओवादियों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है।

Bastar Naxal Surrender 2026

अब भी अंडरग्राउंड हैं कुछ कट्टर कैडर

 

हालांकि स्थिति में सुधार के बावजूद कुछ कट्टर कैडर अब भी अंडरग्राउंड रहकर गतिविधियां जारी रखे हुए हैं। ये माओवादी न केवल आत्मसमर्पण से बच रहे हैं, बल्कि समय-समय पर सुरक्षा बलों को चुनौती भी दे रहे हैं।

 

ऐसे में यह साफ है कि माओवाद पूरी तरह खत्म होने से पहले आखिरी चरण में है, जहां कुछ बचे हुए सदस्य निर्णायक भूमिका में हैं।

 

आईजी का साफ संदेश: आखिरी मौका

 

बस्तर के आईजी सुंदरराज पी ने इस स्थिति को देखते हुए माओवादियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर बॉर्डर क्षेत्र में अब गिनती के ही माओवादी बचे हैं।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि Bastar Naxal Surrender के तहत यह उनके लिए मुख्यधारा में लौटने का आखिरी मौका है। अगर अब भी वे सामने नहीं आते हैं, तो सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तेज की जाएगी।

 

सुरक्षा बलों की रणनीति हुई तेज

 

मौजूदा हालात को देखते हुए सुरक्षा बलों ने अपनी रणनीति को और आक्रामक बना दिया है। लगातार सर्च ऑपरेशन और इंटेलिजेंस इनपुट के जरिए बचे हुए माओवादियों को घेरने की कोशिश की जा रही है।

 

Bastar Naxal Surrender 2026 के इस चरण में सुरक्षा बलों का फोकस साफ है या तो आत्मसमर्पण या फिर कड़ी कार्रवाई।

 

तेलंगाना से भी सरेंडर की अपील

 

इस बीच तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी ने भी माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील की है। उन्होंने बताया कि साल 2024 में 125 तेलंगाना मूल के लोग माओवादी संगठन से जुड़े थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर महज 5 रह गई है।

 

यह आंकड़ा दिखाता है कि Bastar Naxal Surrender 2026 के चलते माओवादी नेटवर्क तेजी से कमजोर हो रहा है।

 

बचे हुए बड़े नाम अभी भी सक्रिय

 

जानकारी के मुताबिक, बचे हुए माओवादियों में कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं। इनमें गणपति और कांकेर-नारायणपुर बॉर्डर में सक्रिय महिला माओवादी रूपी का नाम प्रमुख है, जो अब भी अंडरग्राउंड हैं।

 

इन नेताओं की मौजूदगी से यह संकेत मिलता है कि संगठन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन उसका ढांचा लगभग ढह चुका है।

 

मुठभेड़ या आत्मसमर्पण के बीच खड़े माओवादी

 

Bastar Naxal Surrender 2026 के इस निर्णायक चरण में बचे हुए माओवादी एक अहम मोड़ पर खड़े हैं। उनके सामने दो ही रास्ते हैं आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटना या फिर सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ का सामना करना।

 

क्या खत्म हो जाएगा माओवाद?

 

बस्तर में माओवाद का ढांचा अब लगभग खत्म होने की स्थिति में है, लेकिन पूरी तरह समाप्त होने के लिए अंतिम कदम उठाना बाकी है।

अब देखना यह है कि बचे हुए माओवादी कौन सा रास्ता चुनते हैंमुख्यधारा में वापसी या फिर संघर्ष का अंत।

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