फिर जलेगा बांग्लादेश ? इधर तारिक रहमान ने ली शपथ, उधर जमात ने दे खुली धमकी 

ढाका। बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव और जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) ने भारी बहुमत के साथ जीत हासिल की और तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं, लेकिन मंगलवार को सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह में बड़ा विवाद खड़ा हो गया।

बीएनपी के निर्वाचित सांसदों ने संसद सदस्य के रूप में शपथ तो ली, लेकिन जुलाई चार्टर से जुड़े संविधान सुधार परिषद (Constitution Reform Council) के सदस्य के रूप में दूसरी शपथ लेने से इनकार कर दिया। इस फैसले से नाराज जमात-ए-इस्लामी और उसकी 11-पार्टी गठबंधन सहयोगी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने बीएनपी कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार कर दिया।

जमात नेता शफीकुल इस्लाम मसूद और अन्य नेताओं ने कहा कि पार्टी ने संसदीय समिति की बैठक में यह फैसला लिया है। उन्होंने बीएनपी पर आरोप लगाया कि जुलाई चार्टर के कई प्रावधानों पर पार्टी की आपत्ति होने के बावजूद अब वह सुधारों से पीछे हट रही है। जमात महासचिव मिया गोलाम परवार ने बीएनपी को ‘फासीवादी’ ताकत करार देते हुए कहा कि चुनाव में कथित हेरफेर, चुनाव बाद हिंसा और नोआखाली में एनसीपी समर्थक महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म जैसी घटनाओं के खिलाफ सड़क पर विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।

एनसीपी के मुख्य आयोजक नासिरुद्दीन पटवारी ने भी कहा कि महिलाओं के खिलाफ दमन के विरोध में आंदोलन जारी रहेगा और वे तारिक रहमान को जवाबदेह ठहराएंगे।

दोहरी शपथ की आवश्यकता क्यों?

12 फरवरी के चुनाव के साथ जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह भी हुआ, जिसमें लगभग 60-62% मतदाताओं ने समर्थन दिया। जुलाई चार्टर अंतरिम सरकार (मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में) द्वारा 17 अक्टूबर 2025 को अपनाया गया दस्तावेज है, जो 2024 की छात्र-नेतृत्व वाली क्रांति के बाद शासन व्यवस्था में बड़े बदलावों की सिफारिशें शामिल करता है। इसमें संविधान संशोधन, प्रधानमंत्री की कार्यकाल सीमा, संसद को द्विसदनीय बनाना, महिलाओं की अधिक भागीदारी, न्यायिक स्वतंत्रता आदि शामिल हैं।

इस चार्टर को लागू करने के लिए संसद को 180 दिनों के लिए संविधान सुधार परिषद में बदलना है। इसलिए सांसदों को दो शपथ लेनी थीं  एक सामान्य सांसद की और दूसरी सुधार परिषद की सदस्य की। बीएनपी ने चार्टर पर हस्ताक्षर तो किए थे, लेकिन अब कह रही है कि अंतिम दस्तावेज में कई नई बातें जोड़ी गई हैं, जिन पर पार्टी की सहमति नहीं थी और उससे राय नहीं ली गई।

जमात और एनसीपी के सांसदों ने दोनों शपथें लीं, जबकि बीएनपी ने केवल संसद सदस्य की शपथ ली। इस विवाद से संसद की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है और जमात गुट ने सड़क आंदोलन की धमकी दी है, जो 2024 की तरह बड़े पैमाने पर उभर सकता है।

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