अधूरी और गड्ढों से भरे सड़कों पर टोल वसूली पर रोक, आम यात्री के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
वाहन मालिकों और आम यात्रियों को राहत देने वाला एक ऐतिहासिक फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया है। मंगलवार, 19 अगस्त को अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधूरे हैं, गड्ढों से भरे हैं या ट्रैफिक जाम की वजह से यात्रा दुश्वार हो जाती है, तो यात्रियों को टोल टैक्स भरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
केरल हाईकोर्ट का फैसला बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश उस समय दिया जब उसने केरल हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया। हाईकोर्ट ने त्रिशूर जिले के पलियेक्कारा टोल प्लाजा पर टोल वसूली पर रोक लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश भूषण आर. गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि नागरिक वाहन खरीदते समय पहले ही टैक्स अदा कर चुके होते हैं। ऐसे में उन्हें टूटी-फूटी और जामग्रस्त सड़कों पर दोबारा शुल्क क्यों देना चाहिए?
एनएचएआई की दलील खारिज
एनएचएआई (NHAI) और कंसेशनेयर कंपनियों ने अदालत में यह कहते हुए अपील की कि टोल रोकने से उन्हें प्रतिदिन करीब ₹49 लाख का घाटा होगा, क्योंकि यह राशि सड़क रखरखाव में खर्च होती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि यात्रियों का हित आर्थिक नुकसान से कहीं ज्यादा अहम है। अदालत ने सवाल उठाया—“जब किसी सड़क पर सफर करने में 12 घंटे लग रहे हों, तो कोई यात्री ₹150 क्यों देगा?”
ठेकेदार पर जिम्मेदारी तय
कोर्ट ने सड़क पर बने ब्लैक स्पॉट और खराब निर्माण के लिए ठेकेदार कंपनी मेसर्स पीएसटी इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन्स को भी जिम्मेदार ठहराने का निर्देश दिया। साथ ही केरल हाईकोर्ट को इस मामले की निगरानी जारी रखने को कहा।
टोल निलंबन कितने दिन रहेगा?
अभी के लिए टोल वसूली को चार हफ्तों तक या ट्रैफिक की स्थिति सामान्य होने तक निलंबित रखा जाएगा। सुधार होने पर एनएचएआई दोबारा टोल वसूली की अनुमति मांग सकता है।
