बहुविवाह बैन! विधानसभा में विधेयक पारित, उल्लंघन पर 7 साल की जेल.. सरकारी योजनाएं भी बंद

गुवाहाटी, 28 नवंबर 2025। असम विधानसभा ने गुरुवार को ‘असम प्रोहिबिशन ऑफ पॉलीगैमी बिल, 2025’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया, जो बहुविवाह को अपराध घोषित करता है। यह विधेयक महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और लैंगिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की ओर पहला कदम बताते हुए कहा कि अगले विधानसभा चुनाव में BJP की सत्ता वापसी पर पहले सत्र में UCC बिल लाया जाएगा।

 

बहुविवाह की सख्त परिभाषा और सजा: 7-10 साल की जेल, जुर्माना

विधेयक में बहुविवाह को परिभाषित किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी मौजूदा वैवाहिक स्थिति (जीवित जीवनसाथी के साथ कानूनी तलाक या विवाह रद्द न होने पर) छिपाकर दूसरा विवाह करता है, तो यह अपराध होगा। इसके प्रमुख प्रावधान:

 

– सामान्य बहुविवाह: 7 वर्ष तक कारावास और जुर्माना।

– मौजूदा शादी छिपाने पर: 10 वर्ष तक कारावास और जुर्माना।

– दोबारा अपराध: निर्धारित सजा का दोगुना।

– सहयोगियों पर सजा: ग्राम प्रधान, काजी, माता-पिता या अभिभावक जो तथ्य छिपाते हैं या इसमें हिस्सा लेते हैं, उन्हें 2 वर्ष तक जेल और 1 लाख रुपये तक जुर्माना। विवाह कराने वाले को 2 वर्ष जेल या 1.5 लाख जुर्माना।

 

यह अपराध संज्ञेय है, जिसमें पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है। विधेयक सभी धर्मों (हिंदू, मुस्लिम, ईसाई आदि) पर लागू होगा और शरिया एक्ट की छूट को चुनौती देगा।

 

पीड़ित महिलाओं को मुआवजा, सरकारी लाभों से वंचन

विधेयक पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने पर जोर देता है। राज्य सरकार एक प्राधिकरण गठित करेगी, जो मामले के आधार पर मुआवजा (कम से कम 1.40 लाख रुपये) तय करेगी। दोषी व्यक्ति

– सरकारी नौकरी या नियुक्ति के अयोग्य।

– राज्य वित्तपोषित योजनाओं का लाभार्थी नहीं बनेगा।

– पंचायती राज, शहरी निकाय चुनाव नहीं लड़ सकेगा।

यह प्रावधान बहुविवाह से प्रभावित महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

 

छठी अनुसूची और ST समुदायों को छूट

विधेयक अनुसूचित जनजाति (ST) सदस्यों और छठी अनुसूची के क्षेत्रों (बोडोलैंड, डिमा हसाओ, कार्बी आंग्लोंग, वेस्ट कार्बी आंग्लोंग) को लागू नहीं होगा, क्योंकि इनकी प्रथागत कानूनों में बहुविवाह की अनुमति है। CM सरमा ने उम्मीद जताई कि ये स्वायुक्त क्षेत्र भी समान कानून लाएंगे।

 

UCC की ओर कदम, विपक्ष का विरोध

विधेयक पेश करने से पहले विधानसभा में बहस हुई। CM सरमा ने कहा, “यह बिल UCC की दिशा में पहला कदम है। तुर्की जैसे मुस्लिम देशों ने भी बहुविवाह प्रतिबंधित किया है। असम में महिलाओं के अधिकारों से समझौता नहीं होगा।” उन्होंने 2026 चुनाव में UCC लागू करने का वादा दोहराया। विपक्ष (कांग्रेस, AIUDF, राजियर दल) ने इसे ‘मुस्लिम-विरोधी’ बताते हुए वॉकआउट किया, लेकिन सरमा ने स्पष्ट किया कि बिल धर्म-निरपेक्ष है और हिंदू समुदाय में भी बहुविवाह मौजूद है।

 

महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक सुधार

असम सरकार ने 25 नवंबर को विधेयक पेश किया, जो 11 नवंबर को कैबिनेट से मंजूर हुआ था। यह उत्तराखंड के UCC बिल से प्रेरित है, जो बाल विवाह रोकने, बहुविवाह प्रतिबंध, उत्तराधिकार कानून और लिव-इन रिलेशनशिप पंजीकरण पर केंद्रित है। CM ने फरवरी तक ‘लव जिहाद’ रोकने वाले कानून का भी ऐलान किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिल असम में सामाजिक सद्भाव और महिलाओं का सशक्तिकरण बढ़ाएगा, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है।

 

यह फैसला असम की राजनीति को नई दिशा दे सकता है, खासकर 2026 चुनाव से पहले।

Youthwings