कूनो में एक और चीता की मौत 27 माह की मादा KGP11 ने इलाज के दौरान तोड़ा दम, 52 रह गई भारत में कुल संख्या
श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा, KGP11 एक जून को मुरैना के पहाड़गढ़ में घायल मिली थी।
श्योपुर। कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को 27 माह की भारतीय मूल की मादा चीता KGP11 की उपचार के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद एक बार फिर चीता प्रोजेक्ट की निगरानी व्यवस्था और मॉनिटरिंग सिस्टम पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
पहाड़गढ़ के पास घायल मिली थी मादा चीता
जानकारी के अनुसार, 1 जून को मुरैना जिले के पहाड़गढ़ क्षेत्र के पास मादा चीता घायल अवस्था में मिली थी। उसे रेस्क्यू कर पालपुर स्थित पशु चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां करीब पांच दिन तक उपचार चला, लेकिन शनिवार शाम उसने दम तोड़ दिया। चीता प्रोजेक्ट प्रबंधन ने प्रेस नोट जारी कर यह जानकारी साझा की है।
एक महीने में चार शावकों और मादा चीता की मौत
गौरतलब है कि पिछले एक महीने में कूनो नेशनल पार्क के चार नन्हे शावकों और मादा चीता KGP11 की मौत हो चुकी है। हर बार मौत के बाद जांच और मॉनिटरिंग को और मजबूत करने के दावे किए गए, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों ने वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर चीतों की लगातार और प्रभावी निगरानी होती तो कई मामलों में समय रहते उपचार और बचाव संभव हो सकता था।
दूसरी ओर मादा चीता का कूनो की सीमा से बाहर जाना और फिर घायल अवस्था में मिलना, चीतों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
पोस्टमार्टम के बाद होगा मौत के कारणों का खुलासा
वन विभाग का कहना है कि चीते की मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। पोस्टमार्टम रविवार को किया जाएगा, जिसके बाद ही मौत की सही वजह स्पष्ट हो पाएगी।
कूनो में अब सिर्फ 49 चीते शेष
चीता परियोजना के ताजा आंकड़ों के अनुसार, KGP11 की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में अब 49 चीते शेष हैं। इनमें 32 भारतीय मूल के चीते हैं, जबकि 19 चीते फिलहाल खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं। भारत में कुल चीता आबादी अब घटकर 52 रह गई है, जिसमें कूनो के 49 और गांधी सागर अभयारण्य के तीन चीते शामिल हैं।
बार-बार उठ रहे सवाल
KGP11 की मौत के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा के केंद्र में है कि क्या लगातार हो रही मौतों के बावजूद चीता प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था में अभी भी सुधार की जरूरत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से लाए गए चीतों का भारतीय परिस्थितियों में ढलना अब तक चुनौतीपूर्ण रहा है। लगातार हो रही मौतों ने इस प्रोजेक्ट की सफलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाना शुरू कर दिया है। फिलहाल, वन विभाग और पार्क प्रबंधन आगे की जांच और आवश्यक कार्रवाई में जुट गए हैं।
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