अनिरुद्धाचार्य महाराज के विवादित बयान पर बवाल जारी, अब महिला अधिवक्ताओं ने कोर्ट में दाखिल की याचिका

मथुरा। 25 वर्षीय युवतियों पर दिए गए विवादित बयान को लेकर अनिरुद्धाचार्य महाराज के खिलाफ विरोध और कानूनी कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया है। मथुरा की महिला अधिवक्ताओं ने इस संबंध में एसीजेएम प्रथम कोर्ट में याचिका दायर कर महाराज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

पहले एसएसपी को दी थी शिकायत, कार्रवाई न होने पर कोर्ट की शरण

इससे पहले महिला वकीलों ने मथुरा के एसएसपी को भी शिकायती पत्र सौंपा था। उस समय एसएसपी ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे नाराज होकर महिला अधिवक्ताएं अब न्यायिक प्रक्रिया के जरिए कार्रवाई की मांग कर रही हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह बयान केवल महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला नहीं, बल्कि समाज में अशांति फैलाने वाला भी है।

क्या कहा था अनिरुद्धाचार्य ने?

मामला 25 जुलाई को अनिरुद्धाचार्य महाराज के एक बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “25 साल की उम्र तक लड़कियां पूरी तरह परिपक्व हो जाती हैं, और यदि देर से विवाह होता है तो प्री-मैरिटल रिलेशनशिप की संभावना बढ़ जाती है।” उनके इस बयान के बाद महिला वर्ग और अधिवक्ता समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया।

विरोध तेज, पुतला दहन और बार एसोसिएशन का फैसला

बयान के तुरंत बाद 26 जुलाई को मथुरा कचहरी परिसर में महिला वकीलों और बार एसोसिएशन के सदस्यों ने अनिरुद्धाचार्य महाराज का पुतला फूंका और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बार एसोसिएशन ने इस बयान को महिला विरोधी और अपमानजनक बताते हुए महाराज पर मुकदमा दर्ज कराने का निर्णय लिया था।

अब कानूनी और सामाजिक दोनों मोर्चों पर घिरते अनिरुद्धाचार्य

विवादित बयान ने अब सामाजिक से ज्यादा कानूनी मोर्चा अख्तियार कर लिया है। कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में प्रवेश कर गया है, और यदि अदालत ने इसे संज्ञान में लिया तो महाराज के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हो सकता है।

महिला अधिवक्ताओं का कहना है कि धार्मिक मंच से महिलाओं को इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी का निशाना बनाना न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि यह समाज में नकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है। वे चाहती हैं कि ऐसी टिप्पणियों को लेकर एक कड़ा कानूनी संदेश दिया जाए।

पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज का बयान

अब इस मुद्दे पर चित्रकूट के तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। एक पॉडकास्ट में जब उनसे इस विवादित बयान पर राय मांगी गई, तो उन्होंने कहा, “मैं ऐसे वाक्य नहीं बोलता। मैं पढ़ा-लिखा व्यक्ति हूं, दो बार यूनिवर्सिटी टॉपर रह चुका हूं। जेआरएफ और पीएचडी भी हूं। यह बयान न कहना चाहिए न सुनना चाहिए। महिलाओं को अपने चरित्र की रक्षा करनी चाहिए, विवाह जल्दी हो या देर से, वह उचित और वर्ण के अनुसार होना चाहिए। आज महिलाओं को लक्ष्मीबाई बनने की आवश्यकता है।”

फिल्म अभिनेत्री दिशा पाटनी की बहन और पूर्व सैन्य अधिकारी खुशबू पाटनी ने भी अनिरुद्धाचार्य पर निशाना साधते हुए उनके बयान को “दोहरे मापदंड वाला” करार दिया। विवाद बढ़ने पर अनिरुद्धाचार्य ने सफाई दी और कहा कि उन्होंने यह टिप्पणी केवल कुछ लड़कियों के संदर्भ में की थी, फिर भी यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो वे क्षमाप्रार्थी हैं।

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