अमेजन वेब सर्विस ने Meesho से मांगे 127 करोड़ रुपए, जानें मामला
IPO-bound Meesho
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो अपना IPO लाने की तैयारी में है, लेकिन इस बीच कंपनी अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) के साथ कानूनी विवाद में घिरी हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला मीशो की अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में उजागर किया गया है, जिसे कंपनी ने SEBI के पास जमा किया है।
विवाद का कारण
मीशो और AWS के बीच विवाद 127.45 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान को लेकर है। AWS का आरोप है कि मीशो ने उनके साथ हुए स्पेशल प्राइसिंग एग्रीमेंट के तहत बिलों का भुगतान नहीं किया। AWS ने 25 फरवरी 2022 को मीशो के साथ यह एग्रीमेंट किया था। अब AWS ने नई दिल्ली के तीन सदस्यीय आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल के जरिए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
AWS के क्लेम में शामिल हैं:
स्पेंड कमिटमेंट शॉर्टफॉल
पेंडिंग सर्विस फीस
इनवॉइस पर इंटरेस्ट
आर्बिट्रेशन की लागत
मीशो का पक्ष
मीशो ने AWS के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि AWS की सर्विस में कई तकनीकी खामियां थीं और इसलिए बिलों को मान्यता नहीं दी जा सकती। DRHP में मीशो ने AWS के क्लेम को डिस्प्यूटेड चार्जेस बताया है। साथ ही, मीशो ने 86.49 करोड़ रुपये का कंपनसेशन भी मांगा है, यह दावा करते हुए कि AWS की खराब सर्विस के कारण उन्हें बिजनेस में नुकसान हुआ।
क्लाउड सर्विस पर निर्भरता
मीशो का बिजनेस क्लाउड सर्विसेज पर निर्भर है। वेबसाइट, ऐप और यूजर डेटा सभी सर्वरों पर चलते हैं। DRHP में मीशो ने लिखा कि अगर क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर या कोई तीसरा पार्टनर समय पर जिम्मेदारी नहीं निभाता, तो इसका सीधा असर बिजनेस पर पड़ सकता है। इसके अलावा, मीशो कॉल सेंटर, टेलिफोन सर्विस और ऑफ-रोल कर्मचारियों के लिए भी कई थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स पर निर्भर है।
IPO की तैयारी
मीशो अपने IPO के जरिए नए शेयर और ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से फंड जुटाएगी। नए इश्यू की राशि 4,250 करोड़ रुपये है, जबकि OFS में कंपनी के प्रमोटर और अन्य निवेशकों द्वारा 17.5 करोड़ शेयर की बिक्री शामिल है। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, मीशो का कुल IPO साइज 5,800 से 6,600 करोड़ रुपये के बीच होने की संभावना है।
