AI Impact Summit : AI के नाम पर तमाशा? ग्लोबल मंच पर ग्लोबल शर्मिंदगी… दुनिया के सामने हुई भारत की किरकिरी!
नई दिल्ली, 21 फरवरी 2026: 16 फरवरी से दिल्ली के भारत मंडपम में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ चल रहा था। यह एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन था, जहाँ दुनिया भर से AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के बड़े-बड़े एक्सपर्ट और कंपनियों के मालिक आए थे। यह सम्मेलन 20 फरवरी को खत्म हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहाँ आए, जिससे इस कार्यक्रम की अहमियत और बढ़ गई।
लेकिन इस बड़े आयोजन में कुछ ऐसी घटनाएँ हो गईं, जिसकी वजह से पूरी दुनिया में भारत की बुरी छवि बनी। एक तरफ दुनिया की दो बड़ी एआई कंपनियों के मालिकों ने बच्चों की तरह हरकत की, तो दूसरी तरफ यूथ कांग्रेस के नेताओं ने ऐसा उत्पात मचाया कि देश शर्म से गड़ गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या देश के सम्मान का किसी को कोई मतलब नहीं? राजनीति के चक्कर में क्या हम अपने देश को दुनिया के सामने बदनाम करने से भी नहीं हिचकते? पूरी दुनिया की नजर भारत पर थी, और उस वक्त हमने जो तमाशा किया, उससे भारत की छवि पर बड़ा धब्बा लगा है।
विज्ञान सम्मेलन या राजनीतिक सभा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब सम्मेलन में पहुँचे, तो उन्होंने बड़ी हस्तियों के साथ एक फोटो खिंचवाई। इस फोटो में सभी एक कतार में खड़े थे और एक-दूसरे का हाथ पकड़कर ऊपर उठा रहे थे। शायद यह एकता दिखाने का तरीका था।
लेकिन यह नज़ारा देखकर कई लोगों को अजीब लगा। जहाँ एआई और साइंस जैसे गंभीर विषय पर बात होनी थी, वहाँ यह फोटो सेशन किसी राजनीतिक रैली जैसा लग रहा था। सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर एक साइंस कॉन्फ्रेंस में इस तरह हाथ पकड़कर फोटो खिंचवाने का क्या मतलब था? ऐसा लगा जैसे राजनीति को विज्ञान से ऊपर रखा गया हो।
हाथ मिलाने से मना करने वाले सीईओ
इसी फोटो सेशन में एक और घटना घटी। OpenAI के मालिक सैम ऑल्टमैन और उनकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी एंथ्रोपिक के मालिक डारियो अमोदेई को एक साथ खड़ा किया गया था। सभी नेता एक-दूसरे का हाथ पकड़ रहे थे, लेकिन ये दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़ने से कतरा रहे थे। और एक-दूसरे की तरफ देखा तक नहीं। ऐसा लगा जैसे दो बच्चे लड़कर बैठे हों। अमेरिकी मीडिया ने इस पर मज़ाक भी उड़ाया और लिखा, “एक बार के दुश्मन, हमेशा के दुश्मन।”
बाद में सैम ऑल्टमैन ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं था कि मंच पर क्या हो रहा है।
यूथ कांग्रेस का शर्मनाक प्रदर्शन
अगर ये दोनों सीईओ सिर्फ़ बचकानी हरकत कर रहे थे, तो भारतीय युवा कांग्रेस ने जो किया, उसे बताना या दिखना ही इतना शर्मनाक है। जब पूरी दुनिया भारत में हो रहे इस बड़े आयोजन को देख रही थी, युवा कांग्रेस के चार नेता वहाँ पहुँच गए और उत्पात मचाने लगे।
पुलिस के मुताबिक, इन नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी की अजीब तस्वीरों वाली टी-शर्ट पहनी हुई थी। कार्यक्रम में आकर वे सभी अपनी शर्त खोलकर प्रदर्शन करने लगे, उन्होंने देश के खिलाफ नारे लगाए और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने भारत की छवि खराब करने की कोशिश की। कहा जा रहा है कि उन्होंने नेपाल की तर्ज पर देश को बांटने वाले नारे लगाए।
उनका यह प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि उन्होंने पुलिस से धक्का-मुक्की भी की, जिससे कुछ पुलिसवाले घायल हो गए।
अब सवाल यह है कि क्या देश के सम्मान से इन पार्टियों को कोई मतलब नहीं?
आप राजनीति के चक्कर में इतना आगे निकल सकते हैं कि पूरी दुनिया के सामने देश का अपमान कराओ? विरोध करने का यह तरीका नहीं है। जब पूरी दुनिया की नजर भारत पर है, उस वक्त ऐसी हरकत करना लोकतंत्र नहीं है।
इन चारों नेताओं के नाम हैं – कृष्णा हरि (बिहार), कुंदन यादव (बिहार), अजय कुमार (यूपी) और नरसिम्हा यादव (तेलंगाना)। ये सब युवा कांग्रेस में बड़े पदों पर हैं। पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया और अदालत में पेश किया। अदालत ने इन्हें पाँच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने अदालत में कहा कि इन लोगों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि खराब की है।
क्या भारत सिर्फ ‘दिखावे’ का देश
इस सम्मेलन में एक और बड़ा विवाद हुआ। ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक रोबोट दिखाया और लगा कि उन्होंने यह रोबोट खुद बनाया है। बाद में पता चला कि यह रोबोट चीन में बना था। यूनिवर्सिटी ने सफाई दी कि उन्होंने रोबोट बनाने का दावा नहीं किया था, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। इस घटना से यही लगा कि हम दिखावा तो खूब करते हैं, लेकिन असल में हम अभी बहुत पीछे हैं।
भारत में रोबोटिक्स की असली हकीकत
इन घटनाओं के बीच यह भी चर्चा हुई कि आखिर भारत एआई और रोबोटिक्स के मामले में कहाँ खड़ा है। आईआईटी मंडी के प्रोफेसर अमित शुक्ला ने साफ कहा, “रोबोटिक्स बहुत मुश्किल क्षेत्र है। इसमें एआई को असली शरीर मिलता है।” उन्होंने माना कि भारत इस मामले में 20-30 साल पीछे है। आज भी हम रोबोट के पुर्जों के लिए चीन पर निर्भर हैं। चीन के एक यूनिवर्सिटी का बजट हमारे सभी आईआईटी के बजट से कहीं ज्यादा है।
अच्छी खबर यह है कि भारत में रोबोट लगाने का काम तेजी से बढ़ रहा है। अटेरो कंपनी के नितिन गुप्ता बताते हैं कि भारत हर साल 9,000 से ज्यादा नए रोबोट लगा रहा है। इससे काम करने की क्षमता में 50-60% तक सुधार हुआ है।
लेकिन प्रोफेसर शुक्ला ने एक और बात कही, जो हम सब पर चोट करती है। उन्होंने कहा, “हमें अपनी ‘गरीबी की मानसिकता’ और नौकरशाही से बाहर निकलना होगा। भारत में निवेशक अक्सर 200% गारंटी की तलाश करते हैं।” यह बात सिर्फ रोबोटिक्स पर ही नहीं, बल्कि यूथ कांग्रेस के उस हरकत पर भी सटीक बैठती है, जहां उनकी राजनीति में देशभक्ति की गारंटी शून्य दिखी।
एआई समिट का अंत एक मिले-जुले एहसास के साथ हुआ। एक तरफ भारत ने दुनिया को अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की, तो दूसरी तरफ राजनीति और दिखावे की सच्चाई सामने आ गई। प्रधानमंत्री का हाथ पकड़कर फोटो खिंचवाना, दो एआई मालिकों का बचकाना व्यवहार, यूथ कांग्रेस का उत्पात और चीनी रोबोट वाला विवाद – इन सबने मिलकर यह साबित कर दिया कि हम अभी भी विज्ञान को राजनीति और दिखावे से अलग नहीं कर पाए हैं।
यह घटनाएँ हमें याद दिलाती हैं कि दुनिया में अच्छी छवि बनाने के लिए सिर्फ बड़े-बड़े आयोजन काफी नहीं होते। उस मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले हर व्यक्ति का व्यवहार भी उतना ही जरूरी है। आज जब पूरी दुनिया में भारत की चर्चा हो रही है, तो यह भी चर्चा हो रही है कि हमारे नेता और हमारे राजनेता कितने गैर-जिम्मेदार हो सकते हैं। यह हम सबके लिए शर्म की बात है।
