छत्तीसगढ़ियों से छीनी जा रही नौकरी…? ,बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को दी जा रही प्राथमिकता ! आक्रोश के बाद सरकार ने भर्ती पर लगाई रोक

रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों में अतिथि व्याख्याताओं की भर्ती को लेकर शुरू हुआ विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राज्यभर में मचे बवाल और मूल निवासी अभ्यर्थियों के आक्रोश के बाद सरकार ने भर्ती प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही संभागवार जांच समितियों का गठन कर 7 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

मूल निवासी को छोड़ दूसरे राज्यों के लोगों को दी जाने लगी नियुक्ति :

2024 में बनी नई अतिथि व्याख्याता नीति के अनुसार, छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को इन पदों पर प्राथमिकता देने का स्पष्ट प्रावधान था। लेकिन जब इस नीति का क्रियान्वयन हुआ, तो स्थानीय अभ्यर्थियों को दरकिनार करते हुए दूसरे राज्यों के लोगों की नियुक्ति की जाने लगी।
शुरुआत में स्पष्ट निर्देश था कि स्थानीयता के आधार पर पहले छत्तीसगढ़ के NET/SET/PhD योग्य उम्मीदवारों को मौका दिया जाएगा, लेकिन बाद में नए क्राइटेरिया जोड़े गए, जिससे बाहरी अभ्यर्थियों को समान मौका मिलने लगा। इसके तहत कहा गया कि यदि छत्तीसगढ़ और अन्य राज्य के अभ्यर्थियों के अंक समान हों, तब स्थानीय को वरीयता दी जाएगी।

योग्यता स्कोरिंग सिस्टम बना विवाद की जड़:

18 अगस्त को उच्च शिक्षा विभाग की ओर से योग्यता के आधार पर स्कोर तय करने का नया आदेश जारी किया गया। इसमें PhD को 30 अंक, NET/SET को 20, M.Phil को 15 और अनुभव को 30 अंक दिए गए।
इस स्कोरिंग सिस्टम में केवल समान अंक होने की स्थिति में स्थानीय उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जानी थी। इसका मतलब यह हुआ कि अगर किसी छत्तीसगढ़ी को 69 और बाहरी को 70 अंक मिले, तो नौकरी बाहरी को मिल जाएगी, जो कि मूल नीति की भावना के खिलाफ माना गया।

800 से अधिक पदों पर अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों की भर्ती:

अधिकारिक दावा है कि केवल 200 बाहरी लोगों की नियुक्ति हुई है, लेकिन विभिन्न कॉलेजों में लगे लिस्ट्स के अनुसार 800 से अधिक पदों पर अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों की भर्ती की गई है। छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता संघ का आरोप है कि कई कॉलेजों में बिना पारदर्शिता के बाहरी अभ्यर्थियों की नियुक्तियां की गई हैं, जिससे स्थानीय NET और SET पास युवाओं में भारी असंतोष है।

समस्याएं जो स्थानीय उम्मीदवारों को बना रही हैं कमजोर:

M.Phil की पढ़ाई राज्य में 2017 से बंद है, इसलिए यह योग्यता स्थानीयों के लिए लगभग असंभव हो चुकी है।

SET परीक्षा 6 साल बाद 2024 में हुई, जिससे अधिकांश स्थानीय उम्मीदवारों के पास योग्यताएं अधूरी रहीं।

इसके विपरीत, अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों के पास ये सभी योग्यताएं उपलब्ध रहीं, जिससे वे स्कोरिंग में आगे निकल गए।

क्यों बढ़ी बाहरी अभ्यर्थियों की दिलचस्पी?

2021 तक अतिथि व्याख्याताओं को ₹20,800 का मासिक वेतन मिलता था। 2022 में यह ₹30,000 कर दिया गया और 2024 में बढ़कर सीधे ₹50,000 हो गया। यह वेतन अन्य राज्यों के योग्य अभ्यर्थियों को भी छत्तीसगढ़ की ओर खींच लाया है। स्थानीय व्याख्याताओं का कहना है कि जब वेतन कम था तब उन्होंने सेवा की, अब जब सुविधाएं बढ़ीं, तो उन्हें दरकिनार किया जा रहा है।

इस पूरे मामले में सरकार का क्या कहना है ?

राज्य सरकार ने इस पूरे विवाद को गंभीरता से लेते हुए भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई है। और संभागवार जांच समितियां गठित की हैं। 7 दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। जहां नियुक्तियां हो चुकी हैं, वहां फ़िलहाल प्रक्रिया पर रोक नहीं है।

क्या है अतिथि व्याख्याता संघ की मांग:

छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता संघ के अध्यक्ष लव वर्मा ने मांग की है कि:

सभी नियुक्त अतिथि व्याख्याताओं के मूल निवास प्रमाणपत्रों की जांच हो।

मंत्रिपरिषद की मूल नीति की सही व्याख्या के अनुसार स्थानीयों को स्पष्ट वरीयता दी जाए।

पूर्व में काम कर चुके अनुभवी पीजी अभ्यर्थियों को भी वाजिब अवसर मिले, जिन्होंने वर्षों तक कॉलेजों में अध्यापन किया है।

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