Raipur AIIMS का एआई डॉक्टर, अब सेकंडों में पकड़ेगा हार्ट अटैक का खतरा

Raipur AIIMS

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रायपुर। Raipur AIIMS ने दिल की बीमारी की पहचान में क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब इमरजेंसी वार्ड में आने वाले सीने के दर्द से परेशान मरीज का सिर्फ 1 मिनट में हार्ट अटैक का खतरा पता लगाया जा सकेगा।

कैसे बदलेगा इलाज का तरीका

एम्स के ट्रॉमा-इमरजेंसी विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित इंटेलिजेंट इमरजेंसी केयर सिस्टम (IECS) तैयार किया है। यह सिस्टम मरीज के ईसीजी, ब्लड प्रेशर और पल्स रेट का त्वरित विश्लेषण कर बताता है कि मरीज को हार्ट अटैक का कितना जोखिम है और कौन सी दवा तुरंत देनी चाहिए।

  • 1 से 2 मिनट में रिपोर्ट: डॉक्टर मरीज के लक्षणों से जुड़े करीब 10 सवाल दर्ज करते हैं और सिस्टम तुरंत रिस्क फैक्टर की रिपोर्ट निकाल देता है।

  • सटीक नतीजे: पिछले एक साल में 20 हजार मरीजों पर हुए ट्रायल में यह तकनीक 90 प्रतिशत मामलों में बिल्कुल सटीक साबित हुई।

युवाओं के लिए चेतावनी

ट्रायल में सामने आया कि हार्ट अटैक का खतरा अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। 20 हजार मरीजों में 60 फीसदी 28 से 35 साल के युवा थे। सबसे कम उम्र का मरीज केवल 28 साल का था। कार्डियोलॉजिस्ट्स के अनुसार यह आंकड़े समाज के लिए अलार्म हैं और युवा पीढ़ी को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की जरूरत है।

गांव-गांव पहुंचेगा ‘डिजिटल कार्डियोलॉजिस्ट’

एम्स का अगला लक्ष्य इस सिस्टम को छत्तीसगढ़ के हर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तक पहुंचाना है। वहां के डॉक्टर ऑनलाइन लॉगिन कर सीधे रायपुर एम्स के 10 विशेषज्ञों से जुड़ पाएंगे।

  • ईसीजी रिपोर्ट और वीडियो कॉलिंग से एआई सिस्टम तुरंत मरीज का जोखिम बताएगा और सही दवा सुझाएगा।

  • इससे गांवों में बिना कार्डियोलॉजिस्ट के भी गोल्डन आवर में सही इलाज संभव हो सकेगा और हार्ट अटैक से मौत का खतरा काफी घट जाएगा।

टेक्नोलॉजी पर भरोसा

आईआईटी और केंद्र सरकार की देखरेख में यह तकनीक लगातार अपडेट होती रहेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिस्टम आपातकालीन स्थितियों में जीवनरक्षक साबित होगा और दिल की बीमारियों के इलाज का तरीका बदल देगा।

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