“नेपाल हिंसा पीड़ित होंगे शहीद घोषित” परिवारों को 10-10 लाख मुआवजा, नेपाल की अंतरिम PM सुशीला कार्की का ऐलान

काठमांडू। नेपाल की नई अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने 14 सितंबर को सिंहदरबार में पदभार ग्रहण किया और कार्यभार संभालते ही कई बड़े फैसले लिए। उन्होंने साफ कहा कि वे सिर्फ छह महीने के लिए सत्ता में हैं और इस अवधि में चुनाव कराकर नई सरकार को जिम्मेदारी सौंप देंगी।

हिंसा पीड़ितों को शहीद का दर्जा और मुआवजा

सुशीला कार्की ने घोषणा की कि हालिया Gen-Z आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों को शहीद का दर्जा दिया जाएगा। हिंसा में अब तक 51 लोगों की मौत हुई है, जिनमें एक भारतीय महिला भी शामिल है। कार्की ने पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख नेपाली रुपये मुआवजा देने की घोषणा की।

“सत्ता का स्वाद चखने नहीं आई हूं”

पदभार संभालने के बाद कार्की ने कहा, “मैं और मेरी टीम सत्ता का स्वाद चखने नहीं आए हैं। हम छह महीने में चुनाव कराकर सत्ता छोड़ देंगे। जनता के सहयोग के बिना यह काम संभव नहीं।” उन्होंने भ्रष्टाचार खत्म करने का संकल्प लेते हुए कहा कि तोड़फोड़ और आगजनी में शामिल लोगों की जांच की जाएगी।

युवाओं की उम्मीदें

काठमांडू और अन्य शहरों में युवाओं ने कार्की के फैसलों का स्वागत किया। उनका कहना है कि बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी से तंग आकर ही यह आंदोलन शुरू हुआ था। एक युवक संतोष ने बताया, “छोटे काम के लिए भी सरकारी दफ्तरों में पैसे देने पड़ते थे, जबकि बड़े नेताओं के काम आसानी से हो जाते थे। आम लोग परेशान थे।”

नया मंत्रिमंडल जल्द

काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, कार्की 15 से अधिक मंत्रियों का मंत्रिमंडल बना सकती हैं। संभावित नामों में कानूनी विशेषज्ञ ओम प्रकाश आर्यल, पूर्व सेना अधिकारी बालानंद शर्मा, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आनंद मोहन भट्टराई, ऊर्जा विशेषज्ञ कुलमान घीसिंग, और कई नामचीन डॉक्टर—भगवान कोइराला, संदुक रुइत, जगदीश अग्रवाल, पुकार चंद्र श्रेष्ठ शामिल हैं।

भारत-नेपाल सीमा आंशिक रूप से खुली

हिंसा के बाद बंद पड़ी भारत-नेपाल सीमा अब आम लोगों के लिए खोल दी गई है। आधार कार्ड दिखाकर छोटे वाहन और पैदल यात्री सीमा पार कर सकते हैं। हालांकि, भारी वाहनों पर अभी भी रोक है क्योंकि सीमा के पास स्थित भंडार कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया था, जिससे टैक्स वसूली और दस्तावेजी कामकाज बाधित है।

सुशीला कार्की के त्वरित फैसलों ने नेपाल की राजनीति में नई उम्मीदें जगा दी हैं। अब सभी की नजरें आने वाले 6 महीनों में चुनाव और स्थायी सरकार के गठन पर टिकी हैं।

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