छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा एनकाउंटर: 36 घंटे की मुठभेड़ में 10 खूंखार नक्सली ढेर
गरियाबंद/मैनपुर। छत्तीसगढ़–ओडिशा सीमा पर मैनपुर थाना क्षेत्र के राजाडेरा-मटाल पहाड़ियों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई 36 घंटे लंबी भीषण मुठभेड़ में नक्सली संगठन को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। इस एनकाउंटर में 5.22 करोड़ रुपए इनामी 10 कुख्यात नक्सली मारे गए हैं, जिनमें संगठन के शीर्ष स्तर के कई बड़े चेहरे शामिल हैं।
मारे गए बड़े नक्सली नेता
मुठभेड़ में जिन बड़े नक्सलियों को ढेर किया गया, उनमें प्रमुख नाम हैं—
- मोडेम बालकृष्णा उर्फ मनोज (सेंट्रल कमेटी सदस्य), जिस पर 1.5 करोड़ रुपए का इनाम था।
- प्रमोद उर्फ पांडु/पंडरन्ना (ओडिशा राज्य कमेटी सदस्य), जिस पर 65 लाख रुपए का इनाम था।
- विमल उर्फ जाडी वेंकट/मगन्ना (टेक्निकल टीम का जिम्मेदार), जिस पर 18 लाख रुपए का इनाम था।
इसके अलावा दो एसीएम (एरिया कमेटी मेंबर) रैंक, दो पीसी एम (प्लाटून/प्रोजेक्ट कमांडर) रैंक और महिला नक्सली नंदे उर्फ मंजू, रंजीता, अंजलि और सिंधु भी मारे गए। कुल मारे गए नक्सलियों में 6 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल हैं।
कैसे चला अभियान
एडीजी विवेकानंद सिन्हा और आईजी अमरेश मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में
बताया कि 11 सितंबर को दोपहर बाद सुरक्षा बलों को इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद गरियाबंद पुलिस की ई-30 यूनिट, एसटीएफ, सीएएफ और कोबरा 207 बटालियन ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन शुरू किया।
11 सितंबर की शाम नक्सलियों ने राजाडेरा-मटाल पहाड़ी में घात
लगाकर सुरक्षाबलों पर अंधाधुंध फायरिंग की। जवानों ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। यह मुठभेड़ गुरुवार सुबह से शुक्रवार सुबह 8 बजे तक यानी लगभग 36 घंटे तक जारी रही।
हथियार और सामग्री बरामद
सर्चिंग के दौरान मौके से 10 नक्सलियों के शव, AK-47, इं
सास, SLR जैसे ऑटोमेटिक हथियार और भारी मात्रा में विस्फोटक व नक्सली सामग्री जब्त की गई।
नक्सल संगठन को बड़ा झटका
अधिकारियों ने बताया कि यह ऑपरेशन नक्सलियों के लिए ऐतिहासिक नुकसान है। यह इलाका लंबे समय से माओवादी लीडरशिप का गढ़ माना जाता था। अब शीर्ष नेतृत्व के कई बड़े नाम खत्म हो जाने के बाद नक्सल संगठन की रीढ़ टूट गई है। इसका असर न केवल गरियाबंद, बल्कि धमतरी और ओडिशा के नक्सल प्रभावित इलाकों पर भी पड़ेगा।
