अब फूटेगा युक्तियुक्तकरण के दौरान किए गए खेला का भांडा: DEO को JD का नोटिस, भ्रष्टाचार के आरोपों की होगी विस्तृत जांच
युक्तियुक्तकरण
सरगुजा : सरगुजा संभाग में शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों में है। अंबिकापुर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा (JD) ने युक्तियुक्तकरण (Rationalization) प्रक्रिया के दौरान की गई कथित गड़बड़ियों और एक लिपिक की नाटकीय बहाली के मामले में स्पष्टीकरण और दस्तावेज मांगे हैं।
शिकायत के बाद जांच के निर्देश
JD कार्यालय को कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी द्वारा शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि पूर्व DEO अशोक कुमार सिन्हा ने युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार किया। इसके तहत लिपिक बृज किशोर तिवारी को नियम विरुद्ध निलंबित कर फिर बिना विभागीय जांच के बहाल कर दिया गया।
JD ने DEO को 3 दिनों के भीतर जांच से संबंधित सभी दस्तावेज और जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। JD ने अपने पत्र में इसे “गंभीर प्रकृति की शिकायत” बताया है, जिसके लिए शीघ्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है।
किन-किन बिंदुओं पर होगी जांच?
युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया संबंधी जांच:
विकासखंड स्तर पर प्रस्तुत अतिशेष व्याख्याताओं की सूची
विद्यालयवार विषयवार रिक्त पदों की प्रमाणित सूचियां
जिला स्तरीय काउंसलिंग की तिथियां व उपस्थित व्याख्याता की सूची
संभागीय काउंसलिंग को भेजी गई सूचियां और तिथि विवरण
संभागीय काउंसलिंग उपरांत जिला कार्यालय में प्राप्त व्याख्याताओं की सूची
निलंबन और बहाली की जांच:
लिपिक बृज किशोर तिवारी के निलंबन आदेश की प्रति
बहाली आदेश और किस शाखा में पुनः पदस्थ किया गया उसकी जानकारी
यदि कोई विभागीय जांच हुई तो उसका प्रतिवेदन
विद्यालयवार प्राथमिकता सूची और स्वीकृत पदों की स्थिति
काउंसलिंग में चयनित पद भरे होने के बाद नियुक्ति पाने वाले व्याख्याता की सूची
अन्य दस्तावेज:
जिला, संभाग और राज्य स्तर पर काउंसलिंग के बाद प्राप्त सभी अभ्यावेदनों की स्थिति
उन व्याख्याताओं की सूची जिनके आवेदन स्वीकार/अस्वीकार किए गए
कोई भी अन्य दस्तावेज जो जांच में सहायक हो
क्या है मामला?
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि युक्तियुक्तकरण के दौरान भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए लिपिक बृज किशोर तिवारी को बलि का बकरा बनाया गया, और फिर उन्हें गुपचुप तरीके से बहाल कर उसी कार्यालय में पदस्थ कर दिया गया। आरोप है कि बिना विभागीय जांच के यह बहाली की गई, जो प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है।
अब JD के पत्र के बाद यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है और DEO कार्यालय में युक्तियुक्तकरण से जुड़ी फाइलों के खुलने के आसार बढ़ गए हैं।
