Nepal Crisis: संसद पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा, वित्त मंत्री पौडेल को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, पीएम ओली ने दिया इस्तीफा
Nepal Crisis: नेपाल इन दिनों भीषण राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। सरकार के खिलाफ छेड़े गए विद्रोह ने हालात इतने बिगाड़ दिए कि सैकड़ों प्रदर्शनकारी संसद भवन में घुस गए, उस पर कब्जा कर लिया और आगजनी तक कर डाली। इस दौरान भीड़ ने सुरक्षाकर्मियों से उनकी बंदूकें भी छीन लीं। हालात पर काबू पाना मुश्किल होता देख आखिरकार प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पद से इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के अनुसार, ओली इस्तीफा नहीं देना चाहते थे, लेकिन सेना के दबाव के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा। यहां तक कि उनके देश छोड़ने की भी अटकलें लगाई जा रही हैं।

काठमांडू में जश्न का माहौल
ओली के इस्तीफे की खबर सामने आते ही राजधानी काठमांडू की सड़कों पर जश्न का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारी खुशी से नाचते-गाते और झंडे लहराते नजर आए।
सेना प्रमुख ने कहा- “पहले इस्तीफा दें…”
सूत्रों के मुताबिक, संकट के बीच पीएम ओली ने नेपाल सेना प्रमुख अशको राज से बातचीत की थी। उन्होंने बिगड़ती स्थिति पर नियंत्रण पाने और खुद को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद मांगी। लेकिन सेना प्रमुख ने साफ कहा कि बिना सत्ता छोड़े हालात काबू में नहीं आ सकते। उन्होंने ओली से पहले इस्तीफा देने की मांग की और भरोसा दिलाया कि उसके बाद सेना हालात संभाल लेगी।

देशभर में फैली अराजकता
नेपाल इस समय गंभीर अस्थिरता से गुजर रहा है। कई मंत्रियों और नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्रियों और नेताओं के घरों व दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया गया है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के 21 सांसदों ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालात इतने बिगड़े कि प्रदर्शनकारियों ने वित्त मंत्री विष्णु पौडेल को सड़क पर पकड़ लिया और दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।

ओली का आखिरी बयान
इस्तीफे से कुछ घंटे पहले ओली ने देश में हिंसा को लेकर बयान जारी किया था। उन्होंने कहा था,
“मुझे राजधानी और देशभर में हुई हिंसक घटनाओं से गहरा दुख है। हमने हमेशा यह नीति अपनाई है कि हिंसा राष्ट्रहित में नहीं है। हम संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की तलाश में हैं। इसके लिए मैंने आज शाम सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है। मैं सभी भाइयों और बहनों से अपील करता हूं कि इस कठिन समय में शांति बनाए रखें।”
लेकिन इससे पहले कि वह हालात पर नियंत्रण पाने की कोई ठोस पहल कर पाते, उन पर बढ़ते दबाव और हिंसा के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
