‘सितंबर में परीक्षा और बच्चे सड़क पर’ : गृहमंत्री के गृह जिले में शिक्षकों की कमी, सड़क पर उतरे स्वामी आत्मानंद स्कूल के बच्चे!

शिक्षकों की कमी

शिक्षकों की कमी

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार एक ओर शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर वास्तविकता इससे बिलकुल अलग नज़र आ रही है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी के चलते अब बच्चे खुद सड़क पर उतरकर सरकार से अपने ‘शिक्षक’ मांग रहे हैं। सवाल अब सिर्फ पढ़ाई का नहीं, बल्कि शिक्षा तंत्र की गंभीर नाकामी का बन चुका है।

बच्चे पूछ रहे हैं — “हम पढ़ाई करें या प्रदर्शन?”

गृहमंत्री के गृह जिले कवर्धा में स्थित इन आत्मानंद स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई है, जिसके चलते छात्र विरोध और प्रदर्शन पर उतर आए हैं। वे पूछ रहे हैं: “हम स्कूल जाएं या सरकार से शिक्षक मांगने सड़क पर उतरें? हम परीक्षा कैसे देंगे जब हमें पढ़ाने वाला कोई नहीं?”

गृहमंत्री जी, जवाब दीजिए—यह प्रदर्शन बच्चों का है या आपकी नाकाम शिक्षा नीति का?

10 नए स्कूल, लेकिन अभी तक नहीं मिले शिक्षक:

वर्तमान शैक्षणिक सत्र में सरकार ने राज्य में 10 नए स्वामी आत्मानंद स्कूल शुरू किए। अंडा, जेपी नगर, बोरसी, कातरो, पाउवारा, कुगदा, तिरगा, अंजोरा (ख), पुरैना और सेक्टर 9 भिलाई जैसे क्षेत्रों में इन स्कूलों की स्थापना की गई। इन स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिनियुक्ति के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। 4 और 6 अगस्त को इंटरव्यू हुए, जिला समिति से अनुमोदन मिला और प्रस्ताव रायपुर भेज दिया गया। लेकिन 20 दिन से ज़्यादा बीत जाने के बाद भी नियुक्ति आदेश जारी नहीं हुए।

बिना शिक्षक, कैसे होगी परीक्षा?

सितंबर में तिमाही परीक्षा प्रस्तावित है, लेकिन शिक्षक ही नहीं हैं तो बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी? अंग्रेजी माध्यम के 18 पद और हिंदी माध्यम के 39 पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके अलावा 155 शिक्षक स्वामी आत्मानंद स्कूलों में प्रतिनियुक्ति के लिए सहमति दे चुके हैं, फिर भी आदेश अटका हुआ है।

क्या कहती है यह स्थिति?

सरकार स्कूल युक्तिकरण और गुणवत्ता की बात कर रही है, लेकिन बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन की कमी सारी योजनाओं को विफल कर रही है। शिक्षा को लेकर गंभीरता तब ही दिखेगी जब स्कूलों में शिक्षक समय पर नियुक्त होंगे और बच्चों की पढ़ाई बिना किसी बाधा से चल सकेगी।

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