सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों को नहीं किया जाएगा बेदखल

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मजनू का टीला में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश में कहा है कि इन शरणार्थियों को किसी भी सूरत में बेदखल नहीं किया जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है कि इन लोगों के पुनर्वास और अधिकारों को लेकर सरकार की क्या योजना है।

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक की लड़ाई

वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि यह मामला पहले दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंचा था, जहां अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि नीति निर्माण सरकार का काम है, अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। अब जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो वहां से इन शरणार्थियों को राहत देते हुए उनके बेदखली पर रोक लगा दी गई है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत मिलेगा अधिकार

विष्णु जैन ने बताया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 2019 के तहत केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान से आए सभी विस्थापित हिंदुओं को भारतीय नागरिकता देने की नीति बनाई है। उन्होंने कहा कि जैसे ही किसी को नागरिकता दी जाती है, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और सम्मान का अधिकार स्वतः लागू हो जाता है।

वर्षों से कर रहे हैं इंतजार

मजनू का टीला में रह रहे करीब 300 पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी बीते कई वर्षों से तिरपाल और टीन के शेड में बेहद खराब परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं। इनका सपना है कि उन्हें भारत की नागरिकता मिल जाए ताकि वे एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें। हालांकि अब तक उनकी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।

गृह मंत्रालय ने जिम्मेदारी से किया किनारा

दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय ने साफ किया था कि शरणार्थियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी मंत्रालय की नहीं, बल्कि DDA की है। वहीं नागरिकता के विषय में मंत्रालय ने कहा कि ये शरणार्थी CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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