किसानों की परेशानी खत्म! सहकारी बैंकों को आधार से जोड़ेगी केंद्र सरकार, किसानों को मिलेंगी सीधी सुविधाएं

किसानों

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रायपुर: केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए देशभर के सभी राज्य सहकारी बैंकों को UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) से जोड़ने का निर्णय लिया है। इस कदम का उद्देश्य किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना है। आधार से लिंक होते ही खाताधारकों को बैंकिंग सेवाएं आसान और डिजिटल रूप में उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे बैंकों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

छत्तीसगढ़ में सहकारी बैंकिंग का दायरा बढ़ेगा

वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में 6 जिला सहकारी बैंकों की 14 शाखाओं के माध्यम से सेवाएं दी जा रही हैं, जबकि राज्य भर में 2739 धान खरीदी केंद्र 2000 से अधिक सहकारी समितियों के अंतर्गत संचालित हो रहे हैं। केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में कम से कम तीन और जिला सहकारी बैंकों की स्थापना की आवश्यकता बताई है।

UIDAI ने तैयार किया नया ढांचा

अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अवसर पर UIDAI ने सहकारी बैंकों को आधार आधारित प्रमाणीकरण सेवाएं प्रदान करने के लिए एक नया तकनीकी ढांचा विकसित किया है। इस ढांचे को सहकारिता मंत्रालय, नाबार्ड, एनपीसीआई और विभिन्न सहकारी बैंकों के परामर्श से तैयार किया गया है। इससे देश के 34 राज्य सहकारी बैंक (SCB) और 352 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCB) लाभान्वित होंगे।

नहीं बनानी पड़ेगी अलग IT प्रणाली

नई प्रणाली के तहत केवल राज्य सहकारी बैंक ही UIDAI के साथ AUA (Authentication User Agency) और KUA (e-KYC User Agency) के रूप में पंजीकृत होंगे। जिला सहकारी बैंक उन्हीं की आईटी संरचना और प्रमाणीकरण सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे। इससे उन्हें अलग से आईटी सिस्टम विकसित करने की जरूरत नहीं होगी, जिससे संचालन में सरलता और लागत में बचत होगी।

सीधे खाते में पहुंचेगी सब्सिडी

इस तकनीकी पहल से सहकारी बैंक तेज़, सुरक्षित और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर सकेंगे। बायोमेट्रिक ई-केवाईसी और फेस ऑथेंटिकेशन की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में खाता खोलना और भी आसान हो जाएगा। इसके साथ ही सरकारी सब्सिडी और लाभकारी योजनाओं की राशि सीधे खातों में जमा की जा सकेगी।

डिजिटल लेनदेन को मिलेगा बढ़ावा

UIDAI का यह ढांचा सहकारी बैंकों को AEPS (Aadhaar Enabled Payment System) और Aadhaar Payment Bridge जैसी सेवाओं का विस्तार करने में मदद करेगा। इससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण व सहकारी क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को मजबूती मिलेगी।

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