बिजली के 65 लाख उपभोक्ता: जनसुनवाई में 65 भी नहीं पहुंचे, तीसरी सुनवाई में करीब दो दर्जन ने रखी अपनी बात

रायपुर: छत्तीसगढ़ में बिजली की कीमतों को लेकर नया फैसला जल्द ही सामने आने वाला है। राज्य की विद्युत वितरण कंपनी ने 4500 करोड़ रुपये के भारी घाटे का हवाला देते हुए बिजली दरों में वृद्धि की मांग की है। ऐसे में 65 लाख से अधिक उपभोक्ताओं की जेब पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है। बिजली नियामक आयोग ने नए टैरिफ तय करने से पहले सोमवार को तीसरी बार जनसुनवाई आयोजित की, जिसमें उपभोक्ताओं की भागीदारी बेहद कम रही। हालांकि कई उपभोक्ताओं ने बिजली के दाम न बढ़ाने की एकजुट मांग की, लेकिन कीमतों में इजाफा लगभग तय माना जा रहा है। अब आयोग कंपनी के वित्तीय विवरणों की जांच के बाद अंतिम निर्णय करेगा।

एकजुट होकर की गई बिजली दर न बढ़ाने की अपील:

हालांकि सीमित संख्या में पहुंचे करीब दो दर्जन उपभोक्ताओं ने एक स्वर में दरों में वृद्धि का विरोध किया। रायपुर निवासी श्याम काबरा समेत कई उपभोक्ताओं ने विभिन्न वर्गों — घरेलू, गैर-घरेलू, किसान और उद्योग — की ओर से दरें न बढ़ाने की मांग की। बिजली कंपनी के कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे और उन्होंने भी अपनी राय रखी। इस दौरान जिन लोगों ने विरोध जताया उनमें मोहन एंटी, अरुण देवांगन, पीएन सिंग, आईके वर्मा (पोहा संघ), मुरमुरा संघ, जनता राइस मिल, प्रगति सिंग और साहिल बत्रा शामिल थे।

औसत से ज्यादा दर पर बिजली खरीदने का आरोप:

छत्तीसगढ़ विद्युत सेवा निवृत्त कर्मचारी-अधिकारी संघ की ओर से अरुण देवांगन ने जनसुनवाई में आरोप लगाया कि बिजली कंपनी ने आयोग द्वारा तय औसत दर ₹3.81 प्रति यूनिट के मुकाबले ₹4.53 प्रति यूनिट की ऊंची दर पर बिजली खरीदी है। उन्होंने इस खरीद की जांच की मांग करते हुए इसे याचिका की समीक्षा का आधार बताया। साथ ही बताया कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की जगह नई नियुक्तियां न होने से बिजली व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

जनसुनवाई पहले टली, अब फिर विरोध:

गौरतलब है कि आयोग में लंबे समय तक दो सदस्य पद खाली रहने के कारण फरवरी में प्रस्तावित जनसुनवाई टल गई थी। सदस्यों की नियुक्ति के बाद 19 और 20 जून को दो दिवसीय जनसुनवाई हुई, जिसमें भी कई उपभोक्ता नहीं पहुंच सके। ऐसे में 30 जून को तीसरी बार सुनवाई का अवसर दिया गया।

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