रहस्यमयी गांव: जहां सांप काटे तो भी नहीं होता कोई असर, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान…
उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक ऐसा अनोखा गांव है, जिसकी मान्यता ने पूरे क्षेत्र को चौंका रखा है। कहा जाता है कि ग्राम जड़ौदा पांडा और इससे जुड़े 12 गांवों में यदि किसी को जहरीला सांप काट भी ले, तो न तो जहर असर करता है और न ही किसी की मौत होती है। इस चमत्कार के पीछे माना जाता है बाबा नारायण दास की दिव्य कृपा का हाथ है।
महाभारत काल से जुड़ा गांव:
सहारनपुर का जड़ौदा पांडा गांव अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। माना जाता है कि यह गांव महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। यहां स्थित बाबा नारायण दास मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। बाबा नारायण दास के वंश से जुड़े 12 गांव — किशनपुरा, जयपुर, शेरपुर, घिसरपड़ी, चरथावल, खुशरोपुर, मोगलीपुर, चोकड़ा, घिस्सूखेड़ा, न्यामू और स्वयं जड़ौदा पांडा — इन सभी में बाबा को ग्राम देवता माना जाता है।
सांप का जहर नहीं करता असर:
स्थानीय लोगों का मानना है कि बाबा नारायण दास की ऐसी कृपा है कि सांप के काटने पर भी जहर असर नहीं करता। न कोई दवा की जरूरत पड़ती है और न ही कोई इलाज कराना होता है। गांव के पंडितों और ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने आज तक ऐसी कोई घटना नहीं सुनी कि किसी व्यक्ति की सांप के काटने से मौत हुई हो।
बाबा नारायण दास का इतिहास:
मान्यता के अनुसार, करीब 700 साल पहले बाबा नारायण दास का जन्म गांव के उग्रसेन और माता भगवती के घर हुआ था। वे पंचायती उदासीन अखाड़े से जुड़े हुए शिव भक्त थे। बाबा ने अपनी 80 बीघा जमीन शिव मंदिर को दान कर दी थी। यहीं पर उन्होंने साधना की और अपने सेवक, घोड़े व कुत्ते के साथ समाधि में लीन हो गए थे। आज भी उनकी समाधि स्थल पर श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर आते हैं।
चमत्कारी मंदिर और जुड़ की मान्यता:
जहां बाबा की समाधि है, उस स्थान को पहले “जुड़” कहा जाता था और वहीं आज “जुड़ मंदिर” स्थित है। पहले यह इलाका बांस के जंगलों से घिरा हुआ था। लोगों का विश्वास है कि इस स्थान पर एक दिव्य शक्ति का वास है जो पूरे क्षेत्र को सांपों के जहर से रक्षा करती है।
