शराब घोटाले में बड़ा खुलासा: 182.98 करोड़ के भुगतान मामले में अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया पर चालान
छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले में मैनपावर एजेंसियों को किए गए भुगतान का मामला एक बार फिर चर्चा में है। CSMCL के 182.98 करोड़ रुपये के मैनपावर भुगतान प्रकरण में EOW-ACB ने तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और एजेंसी संचालक बीआर लोहिया के खिलाफ विशेष अदालत में पूरक चालान पेश किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी शराब दुकानों में कर्मचारियों की तैनाती के नाम पर एजेंसियों को अतिरिक्त भुगतान कराया गया और इस रकम से कथित तौर पर कमीशन लिया गया।
इस मामले में अरुणपति त्रिपाठी न्यायिक रिमांड पर जेल में बंद है, जबकि बीआर लोहिया फरार बताया गया है। जांच एजेंसी ने लोहिया की अनुपस्थिति में भी उसके खिलाफ चालान पेश किया है।
पहले 12 आरोपियों के खिलाफ पेश हो चुका है चालान
EOW-ACB ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से प्राप्त प्रतिवेदन का सत्यापन करने के बाद 5 अक्टूबर 2024 को अपराध दर्ज किया था। इसके बाद मामले की जांच के दौरान कई लोगों और मैनपावर एजेंसियों की भूमिका की पड़ताल की गई।
इस प्रकरण में नवीन प्रताप सिंह तोमर, अनवर ढेबर, एजेंसियों के संचालकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों सहित 12 आरोपियों के खिलाफ 18 मई 2026 को पहला चालान पेश किया गया था। आगे की जांच में अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया की कथित संलिप्तता से जुड़े साक्ष्य मिलने पर अब पूरक चालान दाखिल किया गया है।
निविदा की शर्तों में बदलाव कर भुगतान कराने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, अरुणपति त्रिपाठी 9 मई 2019 से 13 मई 2023 तक CSMCL का प्रबंध संचालक रहा। उसके कार्यकाल में निगम के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज के अलावा निविदाओं तथा मैनपावर एजेंसियों के बिलों को मंजूरी देने की जिम्मेदारी भी थी।
आरोप है कि अनवर ढेबर के कहने पर निविदा की शर्तों में बदलाव कराया गया। इसके बाद कर्मचारियों के वेतन, ओवरटाइम और अन्य मदों के नाम पर अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था बनाई गई। जांच एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए एजेंसियों से कमीशन वसूला गया।
हर महीने 70 से 80 लाख रुपये कमीशन आने का दावा
इस मामले में कथित कमीशन नेटवर्क को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार, सिद्धार्थ सिंघानिया मैनपावर एजेंसियों से नकद कमीशन एकत्र कर अरुणपति त्रिपाठी तक पहुंचाता था।
जांच में सामने आए कथन के मुताबिक, सभी एजेंसियों से मिलाकर हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपये कमीशन आता था। अक्टूबर 2019 से मार्च 2023 के बीच अकेले सुमीत फैसिलिटीज की ओर से लगभग 15.65 करोड़ रुपये दिए जाने की जानकारी भी जांच में दर्ज है।
एजेंसी का दावा है कि अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल के दौरान मैनपावर एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये तक नकद कमीशन प्राप्त कर अनवर ढेबर तक पहुंचाने के साक्ष्य मिले हैं। इसके अलावा, उसके कार्यकाल के बाद भी नवीन प्रताप सिंह तोमर के माध्यम से कथित कमीशन वसूली जारी रहने की जानकारी सामने आई है।
जांच में सेवा शुल्क और ओवरटाइम की राशि पर कमीशन की दर बढ़ाकर एक-तिहाई किए जाने का विवरण भी मिला है। जांच एजेंसी के मुताबिक, अरुणपति त्रिपाठी के हिस्से की कथित अवैध रकम में से करीब 3 करोड़ रुपये ED ने जब्त किए हैं।
बीआर लोहिया की भूमिका पर जांच एजेंसी का दावा
बीआर लोहिया ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड का संस्थापक बताया गया है। अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड भी इसी समूह से जुड़ी कंपनी थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, अधिकारियों को नकद कमीशन देने की व्यवस्था लोहिया के निर्देश पर संचालित होती थी। बिल तैयार कराने से लेकर कमीशन की रकम जुटाने और भुगतान तक में उसकी भूमिका होने का आरोप है।
जांच के दौरान 28.80 लाख रुपये की राशि भी सामने आई थी। आरोप है कि कंपनी के कर्मचारी इस रकम को कथित कमीशन के रूप में पहुंचाने जा रहे थे, तभी ED की कार्रवाई के दौरान इसे जब्त कर लिया गया।
इन पांच मैनपावर एजेंसियों के भुगतान की जांच
सरकारी शराब दुकानों में कर्मचारियों की व्यवस्था के लिए वर्ष 2019 में पांच एजेंसियों को काम सौंपा गया था।
- सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड
- प्राइमवन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड
- ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड
- अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड
- ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड
सेवा शर्तों के अनुसार, कर्मचारियों को नियमित वेतन के अतिरिक्त ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम का भुगतान मिलना था। एजेंसियों को पहले कर्मचारियों को यह राशि देनी थी और उसके बाद निगम से भुगतान लेना था।
हालांकि, जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ एजेंसियों ने कर्मचारियों को पूरी राशि दिए बिना या वास्तविक भुगतान से अधिक रकम दिखाकर बिल प्रस्तुत किए। इसके आधार पर CSMCL से भुगतान प्राप्त किया गया।
इस मामले में अब दो और आरोपियों के खिलाफ पूरक चालान पेश किया गया है। कथित भुगतान घोटाले और कमीशन के आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।
