गंगरेल में जल सत्याग्रह: पुनर्वास की मांग पर कमर तक पानी में उतरे 100 लोग, तीसरे दिन 9 की तबीयत बिगड़ी

गंगरेल में जल सत्याग्रह

गंगरेल बांध के निर्माण से प्रभावित परिवारों का पुनर्वास का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रभावितों ने एक बार फिर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है। करीब 100 लोग बांध के पानी में खड़े होकर विरोध जता रहे हैं। आंदोलन के तीसरे दिन नौ प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। प्रभावित परिवारों का कहना है कि लंबे समय से मांग उठाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

तीन दिन से जारी जल सत्याग्रह, नौ लोगों की तबीयत बिगड़ी

पुनर्वास की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी बांध के पानी में उतरकर शासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन के तीसरे दिन नौ लोगों को थकान, कमजोरी और पैरों में संक्रमण जैसी दिक्कतें होने लगीं। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

प्रदर्शनकारियों का यह कदम उस समस्या को उजागर करता है, जिससे प्रभावित परिवार लंबे समय से जूझ रहे हैं। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय ले और पुनर्वास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाए।

52 गांवों के 8,700 परिवारों पर पड़ा था असर

गंगरेल बांध के निर्माण के समय 52 गांव डुबान क्षेत्र में आ गए थे। इन गांवों में रहने वाले लगभग 8,700 परिवारों को मुआवजा देकर विस्थापित किया गया था। हालांकि, मुआवजा मिलने के बाद भी सभी प्रभावित परिवारों को पुनर्वास की सुविधा नहीं मिल पाई।

तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कार्यकाल में प्रभावितों को बसाने के लिए जोगीडीह गांव बसाया गया था। लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वहां केवल 109 परिवार ही बसाए गए। बाकी परिवार पुनर्वास से वंचित रह गए और अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करते रहे।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं सुलझा मामला

पुनर्वास से वंचित परिवारों ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। करीब छह साल पहले अदालत ने सभी प्रभावितों को समान दर्जा देते हुए एक समान पुनर्वास की व्यवस्था करने का आदेश राज्य सरकार को दिया था।

प्रभावित परिवारों के मुताबिक, आदेश के बाद भी उन्हें अब तक अपेक्षित पुनर्वास नहीं मिला है। इसी वजह से यह मुद्दा बार-बार आंदोलन का रूप ले रहा है। उनका कहना है कि जब अदालत ने समान पुनर्वास का निर्देश दिया है, तो सभी पात्र परिवारों को इसका लाभ मिलना चाहिए।

आंदोलन के बीच सरकार के कदम पर टिकी नजरें

जल सत्याग्रह के जरिए प्रभावित परिवार अपनी मांग को फिर से सामने ला रहे हैं। आंदोलन के दौरान नौ लोगों की तबीयत बिगड़ने से स्थिति गंभीर हुई है। अब सवाल यह है कि क्या इस बार प्रशासन और शासन की ओर से कोई ठोस पहल होगी।

बांध निर्माण के वर्षों बाद भी पुनर्वास का मुद्दा लंबित रहना प्रभावित परिवारों की परेशानी को दिखाता है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उनके पुनर्वास से जुड़े मामले का जल्द समाधान किया जाए और अदालत के आदेश का पालन सुनिश्चित हो।

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