Israel-Iran Conflict: अगर अमेरिका युद्ध में शामिल हुआ तो होगा बड़ा खतरा, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दी ट्रंप को चेतावनी

Israel-Iran Conflict

Israel-Iran Conflict

Israel-Iran Conflict: ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध के बीच अब ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि यदि अमेरिका, इजरायल के साथ युद्ध में सक्रिय रूप से शामिल होता है, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए बेहद खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है। उन्होंने इस मामले में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी आगाह किया है, जो अमेरिकी सैन्य भागीदारी पर विचार कर रहे हैं।

अराघची ने यह बयान इस्तांबुल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। वह जेनेवा में हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद लौट रहे थे, जहां यूरोपीय देशों के राजनयिकों के साथ कई घंटे चली बातचीत किसी ठोस नतीजे के बिना खत्म हो गई।

परमाणु ठिकानों पर मंडरा रहा खतरा

अराघची ने कहा कि ईरान अभी भी आगे वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन जब तक इजरायल के हमले जारी हैं, तब तक अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि ईरान, इजरायल द्वारा किए जा रहे लगातार हमलों के बीच कोई कूटनीतिक संवाद शुरू नहीं करेगा।

उधर, अमेरिका और इजरायल की सैन्य भागीदारी की अटकलों के बीच ईरान के परमाणु रिएक्टरों और सैन्य ठिकानों पर संभावित हमलों को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई है। जेनेवा वार्ता के दौरान जब राजनयिक समाधान की कोशिशें चल रही थीं, ठीक उसी समय वाशिंगटन में अमेरिकी सेना की भागीदारी पर चर्चाएं जोरों पर थीं।

अमेरिका से कोई उम्मीद नहीं: ईरान

ईरान के विदेश मंत्री ने साफ किया कि जब तक इजरायल के हमले जारी रहेंगे, तब तक अमेरिका के साथ कूटनीतिक संवाद की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर हमलावर को उसके अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए और हमले बंद हों, तो ईरान आगे की बातचीत के लिए तैयार है।” हालांकि, फिलहाल किसी नई वार्ता की तारीख तय नहीं की गई है।

नेतन्याहू ने फिर दोहराई सख्ती

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर अपने सख्त रुख को दोहराते हुए कहा कि जब तक जरूरी होगा, इजरायल ईरान में सैन्य अभियान जारी रखेगा। उनका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को खत्म करना है। इजरायल के एक शीर्ष जनरल ने भी कहा कि सेना लंबे अभियान के लिए पूरी तरह तैयार है।

हालांकि नेतन्याहू को इस मिशन को अंजाम देने के लिए अमेरिकी सैन्य सहयोग की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की फोरडो यूरेनियम एनरिचमेंट फैसिलिटी जैसी ठिकानों को अमेरिका के बंकर बस्टर बम ही तबाह कर सकते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया है कि अमेरिका की भागीदारी को लेकर वह दो सप्ताह में अंतिम निर्णय लेंगे।

12 जून से जारी है खूनी संघर्ष

इस पूरे संकट की शुरुआत 12 जून से हुई, जब इजरायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों, शीर्ष जनरलों और परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाते हुए हमले शुरू किए। जवाब में ईरान ने भी इजरायल पर हवाई हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच सीधा युद्ध छिड़ गया।

वॉशिंगटन स्थित ईरानी मानवाधिकार संगठन के अनुसार, अब तक ईरान में 263 आम नागरिकों समेत 657 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

इजरायली सेना के आंकड़ों के मुताबिक, ईरान ने अब तक 450 मिसाइलें और 1,000 ड्रोन इजरायल की ओर दागे हैं। इनमें से अधिकांश को इजरायल की मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम ने बीच में ही नष्ट कर दिया, लेकिन फिर भी कम से कम 24 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं।

आने वाले दिन और गंभीर हो सकते हैं

इस पूरे हालात में अमेरिका की भूमिका निर्णायक बन सकती है। यदि वाकई अमेरिका इस युद्ध में शामिल होता है, तो यह संघर्ष सिर्फ इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा मध्य पूर्व और वैश्विक राजनीति इसकी चपेट में आ सकता है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि डोनाल्ड ट्रंप क्या निर्णय लेते हैं और क्या अमेरिका युद्ध में कूदेगा या कूटनीति से हल निकालने की कोशिश करेगा।

Youthwings