2 साल से था PM मोदी का इंतजार, सामने आए तो छात्रों ने कह दी ऐसी बात, सुनकर आप भी करेंगे गर्व!

चेन्नई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को तमिलनाडु के चेन्नई स्थित चेन्नई ट्रेड सेंटर में आयोजित ‘जयगोपाल गारोडिया हिंदू विद्यालय’ के 50वें स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल हुए। प्रधानमंत्री के इस दौरे को लेकर विद्यालय के छात्र-छात्राओं में गजब का जोश और उमंग देखने को मिली। पीएम मोदी के स्वागत के लिए छात्र हाथों में ‘हम यह कर दिखाएंगे, मोदी जी’ लिखी तख्तियां थामे खड़े थे और पूरा परिसर देशभक्ति के जोशीले नारों से गूंज उठा।

‘विकसित भारत में देंगे योगदान’: पीएम से संवाद कर बोले छात्र

प्रधानमंत्री के आगमन और चर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ देश के भविष्य को लेकर अपने विचार साझा किए। एक छात्र ने गर्व जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रूबरू होने का यह मौका उनके जीवन का बेहद खास पल है। छात्र ने संकल्प दोहराते हुए कहा कि वे आने वाले समय में अपने कार्यों से देश का सिर ऊंचा करेंगे और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अपना पूरा योगदान देंगे। वहीं अन्य विद्यार्थियों ने बताया कि खेल, कला और अकादमिक क्षेत्र के साथ-साथ उनके विद्यालय में भारतीय सभ्यता व संस्कृति के संस्कारों को प्रमुखता से सिखाया जाता है।

‘दो साल से था पीएम का इंतजार’, छात्रों ने जताया आभार

समारोह में शामिल एक छात्रा ने भावुक होते हुए बताया कि विद्यालय के 50वें वर्ष के इस ऐतिहासिक पल को प्रधानमंत्री के साथ मनाने के लिए सभी छात्र और शिक्षक पिछले दो वर्षों से बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। विद्यार्थियों ने कहा कि प्रधानमंत्री का प्रत्यक्ष सानिध्य और आशीर्वाद पाना उनके लिए सौभाग्य की बात है। छात्रों ने प्रधानमंत्री की मौजूदगी को अपने जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बताते हुए उनका आभार जताया।

तमिल भाषा और संस्कृति के प्रति लगाव का पीएम मोदी ने किया जिक्र

समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने जीवन अनुभवों को साझा किया और तमिल भाषा तथा संस्कृति के प्रति अपने गहरे अनुराग की बात कही। पीएम मोदी ने 1990 के दशक की ‘एकता यात्रा’ का स्मरण करते हुए बताया कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक की उस यात्रा ने भारत की विविधता को करीब से समझने की दृष्टि दी। उन्होंने इसी दौरान गिरिजा अम्मा से हुई अपनी पहली मुलाकात और निरंतर बने संपर्क का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हीं यात्राओं और अनुभवों ने उनके भीतर तमिल संस्कृति के प्रति अगाध प्रेम और आदर को जन्म दिया।

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