गन्ने का रेट ₹425 हुआ, फिर भी 2 साल में 8,600 हेक्टेयर घट गई खेती

गन्ने का रेट

छत्तीसगढ़ में गन्ना किसानों के आंदोलन के बाद खरीदी दर बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई है। पहले किसानों को 355 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा था। नई दर से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन गन्ने की खेती से जुड़े आंकड़े एक दूसरी तस्वीर भी दिखाते हैं। राज्य में पिछले कुछ वर्षों के दौरान गन्ने की खेती का रकबा घटा है। ऐसे में सवाल है कि क्या बढ़ी हुई कीमत किसानों को गन्ने की खेती के लिए प्रोत्साहित कर पाएगी?

355 से बढ़कर 425 रुपये हुआ गन्ने का भाव

कवर्धा में गन्ने की खरीदी दर बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों ने आंदोलन किया था। करीब 48 घंटे तक चले विरोध के बाद खरीदी दर 355 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल करने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही 2025-26 के पेराई सत्र में खरीदे गए गन्ने का भुगतान भी संशोधित दर के अनुसार किए जाने की बात कही गई।

दर में 70 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब है कि 100 क्विंटल गन्ना बेचने वाले किसान को पुरानी दर की तुलना में 7,000 रुपये अधिक मिल सकते हैं। वहीं, 500 क्विंटल गन्ने पर यह अंतर 35,000 रुपये और 1,000 क्विंटल पर 70,000 रुपये होगा। वास्तविक लाभ किसान की आपूर्ति की गई मात्रा और भुगतान संबंधी नियमों पर निर्भर करेगा।

दो साल में 8,600 हेक्टेयर से ज्यादा घटा खेती का रकबा

गन्ने की कीमत बढ़ने के बीच राज्य में इसकी खेती के क्षेत्रफल में आई कमी भी ध्यान देने वाली है। कृषि विभाग के राज्यवार आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में गन्ने की खेती का रकबा इस प्रकार रहा:

वर्ष गन्ने की खेती का रकबा
2022-23 41,980 हेक्टेयर
2023-24 35,700 हेक्टेयर
2024-25 33,370 हेक्टेयर

आंकड़ों के मुताबिक, 2022-23 से 2024-25 के बीच गन्ने की खेती का रकबा 8,610 हेक्टेयर घट गया। यानी दो साल में इसमें करीब 20.5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

ये आंकड़े बताते हैं कि गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए केवल खरीदी दर ही नहीं, बल्कि किसानों को समय पर भुगतान, कारखानों की क्षमता और गन्ने की नियमित खरीदी जैसी व्यवस्थाएं भी अहम हैं।

57 हजार से ज्यादा किसान सहकारी कारखानों से जुड़े

छत्तीसगढ़ में सहकारी शक्कर कारखानों से जुड़े किसानों की संख्या भी इस कारोबार का बड़ा हिस्सा है। राज्य के सहकारिता विभाग के अनुसार, प्रदेश के सहकारी शक्कर कारखानों में करीब 57,537 किसान शेयरधारक हैं।

हालांकि, यह आंकड़ा राज्य में गन्ना उगाने वाले सभी किसानों के कुल पंजीकरण की संख्या नहीं है। सहकारी कारखानों के शेयरधारक किसानों और गन्ना आपूर्ति करने वाले सभी किसानों की संख्या अलग-अलग हो सकती है।

कवर्धा क्षेत्र के भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने से सितंबर 2025 में करीब 23,476 शेयरधारक किसान जुड़े होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें से लगभग 12,500 से 13,000 किसान हर साल कारखाने को गन्ना उपलब्ध कराते हैं। इससे साफ है कि कारखाने से जुड़ाव और हर साल वास्तविक गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों की संख्या में अंतर हो सकता है।

गन्ने की खेती के लिए क्यों अहम है खरीदी दर?

गन्ना ऐसी फसल है, जिसमें किसान को उत्पादन के बाद खरीदार और भुगतान की व्यवस्था पर काफी निर्भर रहना पड़ता है। यदि कारखानों में पेराई समय पर नहीं होती या गन्ने की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो किसानों को परेशानी हो सकती है।

मार्च 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, बालोद के करकाभाट शक्कर कारखाने में गन्ने की उपलब्धता की कमी के कारण पेराई प्रभावित हुई थी। उस सत्र में कारखाने को 762 किसानों से 36,711 मीट्रिक टन गन्ना मिलने की जानकारी दी गई थी।

ऐसे उदाहरण बताते हैं कि गन्ने की खेती को टिकाऊ बनाने के लिए बेहतर कीमत के साथ पर्याप्त उत्पादन, कारखानों तक समय पर आपूर्ति और भुगतान की स्पष्ट व्यवस्था भी जरूरी है।

केंद्र की FRP और राज्य की खरीदी दर में अंतर

गन्ने की कीमतों पर चर्चा करते समय केंद्र सरकार की उचित एवं लाभकारी कीमत यानी FRP और राज्य में शक्कर कारखानों की खरीदी दर को अलग-अलग समझना जरूरी है।

केंद्र सरकार ने 2025-26 के लिए गन्ने की FRP 355 रुपये प्रति क्विंटल तय की थी। वहीं, छत्तीसगढ़ में किसानों के आंदोलन के बाद कारखानों की खरीदी दर 425 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की घोषणा हुई है। दोनों दरों का आधार और लागू होने की व्यवस्था अलग हो सकती है, इसलिए इन्हें एक ही तरह की दर मानना सही नहीं होगा।

अब बढ़ी हुई कीमत से खेती का रकबा बढ़ेगा?

गन्ने की खरीदी दर में बढ़ोतरी से किसानों की आय को सहारा मिल सकता है। लेकिन राज्य में पिछले वर्षों के दौरान घटे खेती के रकबे को देखते हुए यह भी जरूरी है कि किसान गन्ने की खेती को लेकर भरोसेमंद स्थिति महसूस करें।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि बढ़ी हुई दर का भुगतान किसानों को कब और किस तरह मिलता है, कारखाने कितनी मात्रा में गन्ने की खरीदी करते हैं और अगले कृषि सत्र में खेती का रकबा बढ़ता है या नहीं। फिलहाल, 425 रुपये प्रति क्विंटल की नई दर किसानों के लिए राहत की खबर है, लेकिन गन्ने की खेती को फिर से विस्तार देने की चुनौती बनी हुई है।

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