Kawardha Farmer Protest: ट्रैक्टरों की कतार और किसानों का प्रदर्शन, कवर्धा में क्यों गरमाया माहौल?

Kawardha Farmer Protest: किसानों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर कवर्धा में बुधवार को भारतीय किसान संघ ने बलराम किसान न्याय यात्रा के तहत ट्रैक्टर रैली निकाली। जिलेभर से किसान ट्रैक्टर लेकर कवर्धा पहुंचे और अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर शहर के अलग-अलग पहुंच मार्गों पर प्रदर्शन किया।

रैली के बाद किसान शासन के प्रतिनिधि को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेंगे। किसान संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को आगे अनिश्चितकालीन किया जा सकता है।

गन्ने पर 150 रुपए बोनस की प्रमुख मांग

किसानों की प्रमुख मांगों में गन्ने पर 150 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देना शामिल है। इसके साथ ही गन्ना और बागवानी फसलों को कृषक उन्नति योजना में शामिल करने तथा किसानों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ वार्षिक आदान सहायता देने की मांग की जा रही है।

किसानों का कहना है कि गन्ना उत्पादकों को लागत और भुगतान से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बोनस और आदान सहायता से किसानों को राहत मिल सकती है।

धान की चौथी किश्त और समर्थन मूल्य का मुद्दा

प्रदर्शन के दौरान धान के समर्थन मूल्य और लंबित चौथी किश्त का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। किसान संघ ने पिछले तीन वर्षों में समर्थन मूल्य में हुई वृद्धि को जोड़कर भुगतान करने की मांग की है।

इसके अलावा किसानों ने धान की लंबित चौथी किश्त का जल्द भुगतान करने की मांग रखी है। किसानों का कहना है कि कृषि से जुड़े भुगतान समय पर मिलने से अगली फसल की तैयारी में मदद मिलती है।

चीनी कारखानों की क्षमता बढ़ाने की मांग

किसानों ने जिले के दोनों चीनी कारखानों की क्षमता बढ़ाने की मांग भी उठाई है। साथ ही गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए रिवॉल्विंग फंड बनाने की मांग की गई है।

गन्ने को फसल बीमा योजना में शामिल करने की मांग भी किसानों की 11 सूत्रीय मांगों में शामिल है। किसानों के मुताबिक गन्ने की खरीदी के बाद भुगतान में देरी होने से अगली खेती की तैयारी प्रभावित होती है।

सिंचाई को लेकर भी उठी कई मांगें

किसानों ने सिंचाई व्यवस्था के विस्तार को लेकर भी कई मांगें रखी हैं। इनमें सुतियापाठ, पिलारी और घोघरा नहरों के विस्तार की मांग प्रमुख है।

इसके अलावा नेवारी व्यपवर्तन का विस्तार खपरी तक करने और करिया आमा बांध का निर्माण कराने की मांग भी की गई है। किसानों का कहना है कि सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होने से खेती का क्षेत्र बढ़ाने के साथ फसलों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

घूमंतू गोवंश और धान तौल का मुद्दा

किसान संघ ने घूमंतू गोवंश के पुनर्वास की मांग भी उठाई है। किसानों के अनुसार खुले में घूमने वाले गोवंश से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में गोवंश के लिए स्थायी पुनर्वास व्यवस्था जरूरी है।

इसके अलावा समितियों में 40.700 किलो धान की तौल सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है। किसानों ने धान खरीदी और तौल प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग रखी है।

मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन

ट्रैक्टर रैली में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। रैली के बाद किसान शासन के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपेंगे।

भारतीय किसान संघ ने कहा है कि यदि किसानों की मांगों को लेकर सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन किया जा सकता है। फिलहाल प्रदर्शन के केंद्र में गन्ने का बोनस, धान की चौथी किश्त, फसल भुगतान, सिंचाई, चीनी कारखानों की क्षमता, फसल बीमा और कृषि योजनाओं से जुड़े मुद्दे हैं।

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