कचना की जमीन, सड्डू का प्लॉट और करोड़ों का सवाल! RDA की जमीन आवंटन प्रक्रिया पर कांग्रेस का हल्लाबोल

कांग्रेस का प्रदर्शन

रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की लाभांडी-कचना-सड्डू नगर विकास योजना में जमीनों के पुनर्गठन और अंतिम भूखंड आवंटन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कचना में स्थित जमीन के बदले मंत्री केदार कश्यप की पत्नी से जुड़ी कंपनी राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड को सड्डू में एक भूखंड दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। पार्टी ने इसी आधार पर आवंटन की प्रक्रिया, भूखंड की लोकेशन और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए हैं।

मामला सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने राजीव भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने RDA कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक संबंधित योजना में आगे की कार्रवाई रोक दी जाए।

कचना की जमीन से सड्डू के प्लॉट तक कैसे पहुंचा मामला?

कांग्रेस नेता डॉ. राकेश गुप्ता के मुताबिक, राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड के पास कचना के नालापारा इलाके में करीब 1.33 एकड़ जमीन है। उनका आरोप है कि नगर विकास योजना में इस जमीन के शामिल होने के बाद कंपनी को इसके बदले सड्डू में प्लॉट नंबर 25 प्रस्तावित किया गया है।

योजना से संबंधित उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस प्रस्तावित भूखंड का क्षेत्रफल करीब 2,168 वर्गमीटर यानी लगभग 23,327 वर्गफीट बताया गया है। कांग्रेस का दावा है कि यह भूखंड प्रस्तावित 150 फीट चौड़ी MR-43 सड़क के नजदीक है। पार्टी ने इसी लोकेशन को लेकर आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

कांग्रेस ने दूरी और लोकेशन को बनाया मुद्दा

विवाद का एक प्रमुख बिंदु यह है कि मूल जमीन कचना में होने के बावजूद अंतिम भूखंड सड्डू में प्रस्तावित किए जाने की वजह क्या है। कांग्रेस का दावा है कि दोनों स्थानों के बीच करीब एक किलोमीटर की दूरी है।

डॉ. राकेश गुप्ता ने छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50 का हवाला देते हुए पुनर्गठन और अंतिम भूखंड आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की मांग है कि इस आवंटन के पीछे अपनाए गए नियम, गणना और प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए।

हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए इन आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

23 हजार वर्गफीट के भूखंड पर भी सवाल

कांग्रेस ने प्रस्तावित सड्डू भूखंड के संभावित बाजार मूल्य को लेकर भी सवाल उठाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि MR-43 सड़क के आसपास भविष्य में जमीन की कीमत बढ़ सकती है और इसी वजह से प्रस्तावित भूखंड की लोकेशन महत्वपूर्ण हो जाती है।

हालांकि करोड़ों रुपये की संभावित कीमत से जुड़े आंकड़े कांग्रेस नेताओं के अनुमान पर आधारित हैं। इसे RDA की ओर से घोषित आधिकारिक बाजार कीमत नहीं माना जा सकता। वास्तविक मूल्य का निर्धारण संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और मूल्यांकन के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

मंत्री की पत्नी से जुड़ी कंपनी का नाम क्यों आया?

इस पूरे विवाद में राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड का नाम सामने आने के साथ कांग्रेस ने कंपनी और मंत्री केदार कश्यप की पत्नी के बीच संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस का कहना है कि यदि कंपनी को कचना की जमीन के बदले सड्डू में अंतिम भूखंड दिया जा रहा है तो इस प्रक्रिया में अपनाए गए सभी नियम और मानदंड स्पष्ट किए जाने चाहिए। पार्टी ने इसी आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

मंत्री केदार कश्यप की ओर से इस मामले में प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्ट में दर्ज नहीं है। इसलिए आरोपों और संबंधित पक्ष के आधिकारिक जवाब को अलग-अलग देखा जाना जरूरी है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद RDA पहुंची कांग्रेस

मामले को लेकर कांग्रेस ने राजीव भवन में पत्रकार वार्ता की। इसके बाद पार्टी कार्यकर्ता RDA कार्यालय पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व रायपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन ने किया। पूर्व सभापति प्रमोद दुबे समेत कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

कांग्रेस ने मांग रखी कि योजना में भूखंडों के पुनर्गठन और अंतिम आवंटन की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच हो। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने की मांग की गई।

RDA ने क्या कहा?

विवाद के बीच RDA का पक्ष भी सामने आया है। RDA CEO अवनीश शरण के अनुसार, भूखंड आवंटन को लेकर दावा-आपत्ति की प्रक्रिया जारी है। प्राप्त आपत्तियों की संबंधित समिति द्वारा जांच की जाएगी और उसके बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई होगी।

RDA की ओर से यह भी कहा गया है कि लाभांडी-कचना-सड्डू नगर विकास योजना से जुड़े दस्तावेज और फाइनल प्लॉट आवंटन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

अब दावा-आपत्ति के बाद तस्वीर होगी साफ

फिलहाल विवाद तीन प्रमुख बिंदुओं के आसपास है—कचना की मूल जमीन, सड्डू में प्रस्तावित प्लॉट नंबर 25 और दोनों के बीच की दूरी। इसके साथ ही भूखंड के पुनर्गठन और अंतिम आवंटन में अपनाई गई प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है।

एक तरफ कांग्रेस ने इसे लेकर स्वतंत्र जांच और कार्रवाई पर रोक की मांग की है, वहीं RDA ने दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के बाद नियमानुसार आगे बढ़ने की बात कही है। अब संबंधित दस्तावेजों और आपत्तियों की जांच के बाद ही इस आवंटन को लेकर उठाए गए सवालों पर स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

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