रायपुर जेल में ‘पैसे का खेल’! कैदियों से मारपीट और वसूली के आरोप, वीडियो से मचा हड़कंप
रायपुर सेंट्रल जेल एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। जेल के अंदर से सामने आए कथित वीडियो और ऑनलाइन पेमेंट के स्क्रीनशॉट ने जेल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में कुछ बंदी जेल प्रहरियों पर पैसे मांगने, रकम नहीं देने पर मारपीट करने और परिजनों व वकीलों से मुलाकात में परेशानी खड़ी करने के आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और जेल प्रशासन ने भी इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करने से इनकार किया है।
पैसे देने पर बेहतर बैरक और मेडिकल वार्ड में शिफ्ट करने का आरोप
सामने आए वीडियो में एक बंदी ने आरोप लगाया है कि जेल में कम भीड़ वाले बैरक या मेडिकल वार्ड में शिफ्ट करने के नाम पर कथित तौर पर 15 से 20 हजार रुपये तक की मांग की जाती है। आरोप है कि रकम देने वाले बंदियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है, जबकि पैसे नहीं देने वालों को परेशान किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन भुगतान के कुछ स्क्रीनशॉट भी सामने आए हैं। इन्हें कथित तौर पर जेल से जुड़े लेनदेन का प्रमाण बताया जा रहा है, हालांकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि भी अभी नहीं हुई है।
मुलाकात के लिए भी पैसे मांगने का दावा
बंदियों की ओर से लगाए गए आरोपों में यह भी कहा गया है कि परिजनों और वकीलों से मुलाकात कराने के लिए पैसे मांगे जाते हैं। कथित तौर पर रकम नहीं देने वाले बंदियों की मुलाकात में अड़चन पैदा की जाती है। कुछ रिपोर्टों में मुलाकात के लिए भी अलग से रकम मांगे जाने का दावा किया गया है। इन आरोपों की आधिकारिक जांच या पुष्टि की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
चार जेल प्रहरियों के नाम लेकर लगाए गंभीर आरोप
वायरल वीडियो में बंदियों की ओर से मन्नत पुरैना, टेकराम, मिथिलेश और राजू साहू नाम के जेल प्रहरियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बंदियों का दावा है कि पैसे नहीं देने पर उनके साथ मारपीट की जाती है। एक अन्य वीडियो में एक बंदी ने शरीर पर चोट के निशान दिखाते हुए गंभीर मारपीट का आरोप लगाया है। रिपोर्ट में उसके हाथ-पैर में फ्रैक्चर तक होने का दावा भी दर्ज है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
लंबे समय से पदस्थ होने पर भी उठे सवाल
वायरल वीडियो में कुछ बंदियों की ओर से यह सवाल भी उठाया गया है कि जिन प्रहरियों के नाम आरोपों में सामने आ रहे हैं, उनमें से कुछ लंबे समय से रायपुर जेल में कैसे पदस्थ हैं। रिपोर्ट में करीब दो दशक से एक ही स्थान पर तैनाती को लेकर सवाल उठाए जाने का उल्लेख है।
जेल अधीक्षक ने वीडियो की पुष्टि से किया इनकार
मामले में जेल प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। जेल अधीक्षक ने वायरल वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने से इनकार किया है। उनका कहना है कि फिलहाल यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि वीडियो वास्तव में रायपुर सेंट्रल जेल का ही है। जेल प्रशासन के मुताबिक जेल में बड़ी संख्या में बंदी और 200 से अधिक स्टाफ मौजूद है। ऐसे में वीडियो कब और कहां से बनाए गए, इसकी तत्काल पुष्टि करना संभव नहीं है।
जांच के बाद ही साफ होगी आरोपों की सच्चाई
रायपुर सेंट्रल जेल से सामने आए कथित वीडियो, चोटों के निशान और ऑनलाइन पेमेंट के स्क्रीनशॉट ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, फिलहाल इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं कहा जा सकता। वीडियो की तकनीकी जांच, पेमेंट रिकॉर्ड और बंदियों के मेडिकल परीक्षण जैसी प्रक्रियाओं से ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
