ट्रंप का नया दांव: रूसी तेल के बड़े आयातकों पर 100% टैरिफ का खतरा, क्या भारत को मिलेगी छूट या बढ़ेंगी आर्थिक चुनौतियां?
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों का दायरा और अधिक कड़ा करते हुए एक नए सख्त कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस नए कानून के तहत रूस की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले तेल और प्राकृतिक गैस के शीर्ष खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को दिया गया है। इसके साथ ही ईरान के खिलाफ कड़े अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध लगाने के वैधानिक अधिकार को भी आगामी पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ओवल ऑफिस में ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर कर इसे मंजूरी दी। व्हाइट हाउस की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह नया कानून रूस पर कानूनी प्रतिबंध, व्यापारिक टैरिफ और आर्थिक रोक लगाने के साथ-साथ उनके दायरे को व्यापक स्तर पर बढ़ाने की पूरी शक्ति प्रदान करता है।
शीर्ष 5 आयातक देशों पर गिरेगी टैरिफ की गाज
रिपब्लिकन सीनेटर केटी ब्रिट के कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह कानून राष्ट्रपति को निर्देश देता है कि वे रूसी कच्चे तेल अथवा प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े आयातक (इंपोर्टर) देशों पर, या प्रतिबंधों से बचने में रूस की मदद करने वाले शीर्ष पांच मुल्कों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाएं। हालांकि, जारी किए गए आधिकारिक बयानों में फिलहाल उन विशिष्ट देशों के नामों या किसी देश विशेष के लिए तय टैरिफ दरों का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया गया है।
कानून में कुछ व्यावहारिक रियायतों का भी प्रावधान रखा गया है। इसके तहत उन देशों को छूट मिल सकेगी जो रूस से उसकी कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम आयात करते हैं, बशर्ते वे इस निर्भरता को तेजी से खत्म करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठा रहे हों।
रूसी बैंकों, कुलीन वर्ग और ‘शैडो फ्लीट’ पर भी सीधी चोट
यह नया कानून केवल हाइड्रोकार्बन और ऊर्जा क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका शिकंजा रूस के पूरे वित्तीय तंत्र पर कसेगा। इसके दायरे में रूसी सरकारी अधिकारी, प्रभावशाली अमीर कारोबारी, उनके परिजन, रूस के प्रमुख बैंक और वित्तीय संस्थान शामिल किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की अनदेखी कर गुप्त रूप से कच्चा तेल ढोने वाले रूस के जहाजी बेड़े यानी ‘शैडो फ्लीट’ को भी कड़े प्रतिबंधों का निशाना बनाया गया है। कानून में यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद करने वाले तीसरे देशों और संस्थाओं के खिलाफ प्राइमरी और सेकेंडरी, दोनों प्रकार के प्रतिबंध लगाने का सख्त प्रावधान है।
‘रूस की युद्ध मशीन को फंड देने वालों को कड़ा संदेश’
हस्ताक्षर समारोह के दौरान ओवल ऑफिस में मौजूद सीनेटर केटी ब्रिट ने कहा कि इस बिल को कानून का रूप देकर राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ संदेश दे दिया है कि रूस की आक्रामकता और उसकी युद्ध मशीन को वित्तीय मदद पहुंचाने वालों का अमेरिका पूरी मजबूती से विरोध करेगा। उन्होंने इस विधेयक को पारित कराने में अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों के सहयोग और पूर्व सीनेटर ग्राहम के प्रयासों की सराहना की। वहीं, इडाहो के रिपब्लिकन प्रतिनिधि माइक सिम्पसन ने कहा कि ये कड़े आर्थिक प्रतिबंध युद्ध को समाप्त करने की दिशा में आवश्यक कदम हैं, ताकि रूस किसी भी तरह से अपनी जीत का दावा न कर सके।
